कश्मीर में ऐसे घोला जा रहा है जहर, आंख बंद करके बैठी है महबूबा सरकार


नई दिल्ली (5 मई): कश्मीर काफी लंबे समय से अशांत है, लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ पाकिस्तान और सऊदी अरब में बैठे मौलानाओं का है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कश्मीर में सऊदी और पाकिस्तान के 50 से ज्यादा ऐसे चैनल चलते हैं, जो भारत में प्रतिबंधित है। इनमें जाकिर नाइक का 'पीस टीवी' भी शामिल है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके लिए जरूरी इजाजत भी नहीं ली जाती है। यह सब कुछ PDP-BJP सरकार के नाक के नीचे हो रहा है। कई जगहों पर तो इन केबल ऑपरेटर्स के ऑफिस भी सरकारी इमारतों में हैं। जाकिर नाइक के पीस टीवी के अलावा प्राइवेट ऑपरेटर्स सऊदी सुन्नाह, सऊदी कुरान, अल अरेबिया, पैगाम, हिदायत, नूर, मदानी, सहर, कर्बला, अहलीबात, फलक, जियो न्यूज, डॉन न्यूज जैसे पाकिस्तानी और सऊदी चैनल भी चलाते हैं। इनमें से कोई भी चैनल देश के बाकी हिस्सों में नहीं दिखाए जाते हैं। सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से इन चैनलों पर रोक लगाई गई है।


कुछ सऊदी चैनल कट्टरवादी विचारधारा को फैलाने का काम कर रहे हैं। वे इस्लाम और शरिया का गलत प्रचार करके लोगों को भड़काने का काम करते हैं। इन चैनलों पर वहाबी मौलाना कहते पाए जाते हैं कि महिलाएं अपने पति के सामने आत्मसमर्पण कर दें और केवल उनकी बात मानें। सऊदी सुन्नाह चैनल पर कहा गया, 'किसी महिला को बिना पति की इजाजत लिए घर के बाहर कदम नहीं रखना चाहिए।'


अधिकतर पाकिस्तानी चैनल हिजबुल मुजाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकवादी समूहों के मारे जाने वाले आतंकियों को 'शहीद' बताते हैं। इसके अलावा इन चैनलों पर कश्मीर में चलाए जा रहे सेना के ऑपरेशन को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया जाता है।