पाकिस्तान में ख़ौफ़ के साये में जी रहा है शराब को पसंद करने वाला ये कबीला

कलश घाटी, पाकिस्तान (17 अगस्त) :  पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास पहाड़ों में स्थित कलश आदिवासी घर की बनी शराब को बहुत पसंद करते हैं। रंगबिरंगे त्योहारों में ये कई दिन तक नाच-गाना करते हैं। ये ऐसी मान्यताओं को मानते हैं कि प्रकृति कई माध्यमों से दैवीय संदेश देती है।

अब कलश आदिवासी को चिंता है कि वो रूढ़िवादी मुस्लिम पड़ोसियों से खुद को कैसे बचाएं। इनका मानना है कि हिंदू कुश की पहाड़िया ही इनका सुरक्षा कवच हैं। इस गांव के लोग कहते हैं कि उनकी कलश संस्कृति और धर्म को जबरन धर्मांतरण, डकैतियों और हमलों से खतरा पेश हो रहा है।

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्थित होटल के मैनेजर यासिर कलश का कहना है कि उन्होंने हमारी ज़मीन, हमारे जंगल पर कब्जा कर लिया। कभी कभी वो हमारी औरतों और बकरियों को भी ले जाते हैं। हम डरे हुए हैं, अगले कुछ साल में हमारा वजूद खत्म हो सकता है।

कलश धर्म किसी ज़माने में सेंट्रल एशिया में फैला हुआ था। पाकिस्तान की चित्राल घाटी में रहने वाले करीब 4200 ग्रामीण दुनिया की आखिरी कलश आबादी है। कलश आदिवासी यहां रहते हुए इतने आतंकित है कि अब किसी दूसरे देश में पलायन करने की सोच रहे हैं।