पाकिस्तान से भारत आए इन 'हिंदुओं' का दर्द कोई नहीं सुनता!

नई दिल्ली (11 अगस्त): पिछले एक दशक से ज्यादा वक्त गुजर गया, लेकिन अजमल सिंह को आज भी भारत की नागरिकता का इंतजार है। वह पाकिस्तान से 14 साल पहले आया था और आज भी जोधपुर के बाहरी इलाके में एक रिफ्यूजी कैम्प में रहता है- 10 बच्चों के साथ।

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पार करने से पहले वह एक ड्राइवर था। उसे किसानी या खदानी नहीं आती थी। लेकिन भारत आए पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए केवल यही नौकरी उपलब्ध थी। नागरिकता के लिए उसका आवेदन आज भी राजनैतिक उदासीनता के चलते नौकरशाही और कानून के पचड़ों में फंसा हुआ है।

39 वर्षीय अजमल उन 1 लाख से भी ज्यादा पाकिस्तानी हिंदुओं में से एक है। जिन्होंने धार्मिक उत्पीड़न का हवाला देकर 1965 से भारत में शरण ले रखी है। इनमें से 55,000 लोग राजस्थान में रह रहे हैं। लेकिन आज भी ये "कहीं के भी नहीं" कहे जाते।

इन शरणार्थियों के दर्द को 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने एक वीडियो में दिखाया है। आप भी देखिए:

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=2_klWrNM6QE[/embed]