मुुंबई हमलावरों के वॉयस सेम्पल पर पाकिस्तानी हाई कोर्ट ने कहा...

नई दिल्ली (27 जनवरी): मुंबई के हमले के गुनाहगारों को सजा दिलवाने के प्रयासों को पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर विफल कर दिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रोजिक्यूशन ने कोर्ट से मुंबई के आरोपियों के वॉयस सेम्पल की इजाज़त मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि जिन कथित आरोपियों हवाले से वॉयस सेम्पल की इजाज़त मांगी जा रही है, पहले प्रोजिक्यूशन उन्हें भगौड़ा साबित करे। जब तक प्रोजिक्यूशन ऐसा नहीं करेगा तब तक वॉयस सेम्पल की इजाज़त देना वैधानिक तौर पर उचित नहीं होगा।

इस्लामाबाद हाईकोर्ट सितम्बर 2012 में भी ऐसी ही दो पिटीशन रद्द कर चुका है। क्यों कि उस वक्त सुनवाई के दौरान प्रोजिक्यूशन के वकील बहस के समय गायब थे। इस बार माना जा रहा था कि कोर्ट प्रोजिक्यूशन को भारत के गुनाहगारों के वॉयस सेम्पल की मंजूरी दे सकता है। मगर भारत की आशाओँ पर एक बार फिर पानी फिर गया है।

मुंबई हमलों के गुनाहगारों को सजा दिलाने या जांच को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी जांच ऐजेंसियों को उन सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ेगी जिनके खिलाफ भारत कार्रवाई चाहता है। अभी तक पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने भारत के सुबूतों के आधार पर किसी भी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। यहां तक कि मुंबई हमले में जिंदा पकड़े गये आतंकी कसाब को पाकिस्तान अपना नागरिक मानने से ही इंकार कर चुका है। कसाब को फांसी दी जा चुकी है।