पाकिस्तान ने चेताया- ट्रंप मानसिकता सुधारें, संप्रभु राष्ट्र हैं हम

 

नई दिल्ली (3 मई): पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के दावेदार डॉनल्ड ट्रंप के बयान कर कड़ा ऐतराज जताया है। ट्रंप ने कहा था कि अगर वो अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो लादेन की मुखबिरी करने के आरोप में बंद शकील अफरीदी को पाकिस्तान की जेल से तुरंत रिहा करवायेंगे। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक इस पर चौधरी निसार ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका का उपनिवेश नहीं है। अगर ट्रंप ऐसा सोचते हैं तो उन्हें इस गलतफहमी से बाहर निकलने की जरूरत है।

निसार ने यह भी कहा कि शकील अफरीदी की तकदीर का फैसला केवल पाकिस्तानी कोर्ट ही कर सकता है। दरअसल, फॉक्स न्यूज ने एक इंटरव्यू के दौरान पूछा था कि अगर वो अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो क्या वह शकील अफरीदी को रिहा करवायेंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि वह शकील अफरीदी को दो मिनट में रिहा करवा देंगे। जब उनसे पूछा कि वो कैसे रिहा करवायेंगे तो इस पर ट्रंप ने कहा- मैं उन्हें कहूंगा कि अफरीदी को बाहर करो और उन्हें करना पड़ेगा। अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान को मिलने वाले एफ-16 फाइटर प्लेन्स से अमेरिकी फंड को वापस ले लिया था।

अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ ईमानदारी से ऐक्शन नहीं ले रहा है। शकील अफरीदी के मामले में पाकिस्तान को दूसरी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के इस बयान पर पाकिस्तान के गृह मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिका का कोई उपनिवेश नहीं है। ट्रंप को एक संप्रभु राष्ट्र की तरह पाकिस्तान का सम्मान करना चाहिए। पाकिस्तानी गृह मंत्री ने कहा कि शकील अफरीदी पाकिस्तानी नागरिक है और किसी को हक नहीं है कि उनके भविष्य को लेकर हमें डिक्टेट करे।

निसार खान ने कहा, 'ट्रंप ऐतिहासिक रूप पाकिस्तानियों के बलिदान को खारिज कर रहे हैं। हमारे लोगों ने अमेरिकी मदद में अपनी जान दी है। हम वर्षों से अमेरिकी नीतियों के साथ खड़े रहे हैं। अफरीदी ने ओसामा बिन लादेन तक अमेरिका को पहुंचने में मदद की थी। इसी कारण उन्हें पाकिस्तान में 23 साल की सजा मिली है। अमेरिका में वह हीरो की तरह जाने जाते हैं। जनवरी 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डॉ अफरीदी को हिरासात में लिए जाने के बाद पाकिस्तान को 33 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद को रोक दी थी।