#Balochistan: पाक की नापाक साजिश, आम जनता पर कर रहा है 'Chemical Weapons' का इस्तेमाल

नई दिल्ली (30 अगस्त): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र क्या किया, पाकिस्तान इतना बौखला गया है कि आम नागरिकों पर केमिकल हथियार बरसा रहा है। बलूचिस्तान की एक एक्टिविस्ट ने किया है यह चौंकाने वाला खुलासा। एक्टिविस्ट नायला कादरी ने एक टीवी चैनल पर यह दावा किया है कि पाकिस्तान इन घातक हथियारों का इस्तेमाल करके निर्दोष बलूचियों का जानवरों की तरह कत्लेआम कर रहा है।  बलूच नेता नायला कादरी ने कहा,बलूचिस्तान में रोजाना 100 लोग मारे जा रहे हैं। पाक आर्मी ऐसे मार रही है कि कोई जानवरों को भी नहीं मार सकता। हमारे लोग, हमारे बच्चे मारे जा रहे हैं। रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। बलूचिस्तान के मकराना में मासूम बलूचियों की जो बॉडी मिलीं है, वो इतनी गली हुई हैं कि उनकी पहचान करना संभव नहीं। इंसान की बॉडी के साथ ऐसा तब होता है जब किसी रसायनिक हथियारों से उन पर हमला किया गया हो। गौरतलब है कि बलूचिस्तान ही वो एरिया है जहां 1998 में पाकिस्तान ने बिना किसी एतिहात बरते परमाणु धमाके किए थे। धमाके के बाद 6 साल तक यहां बारिश नहीं हुई थी। यही नहीं जो पानी था वो जहरीला हो गया।

पाकिस्तानी सेना ने किया बलूचिस्तान में नरसंहार...

- कबीलों के कब्जे वाले 95 फीसदी क्षेत्र को 'B एरिया' कहा जाता है  - जबकि 5 फीसदी के बाकी इलाके को 'A एरिया' कहते हैं।  - इस इलाके पर पाकिस्तान पुलिस और सेना का कब्जा है।  - पाकिस्तान B एरिया को A में तब्दील करना चाहता है। - इसके लिए जोर जबरदस्ती के चलते बलूचिस्तान में विरोध की आग भड़क चुकी है। - बलूचिस्तान के लोग अब पाकिस्तान से अलग देश की मांग करने लगे हैं।  - हर साल बलूचिस्तान में 27 मार्च को काला दिन मनाया जाता है।  - बलूच नेता बलाच पुरदली ने खोली पाकिस्तान की पोल। - पुरदली के मुताबिक पाकिस्तान अब तक करीब 19 हजार बलूचियों को मार चुका है।

अलग-अलग संस्थाओं की रिपोर्ट खोलती है पाक की पोल-

- यूएनपीओ (UNREPRESENTED NATIONS AND PEOPLES ORGANIZATION) की रिपोर्ट के मुताबिक 1948 के बाद से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं।

- यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 33 हजार बलोच बच्चे विकलांग हो चुके हैं। 8 से 10 बच्चे रोजाना भूखमरी की वजह से मर रहे हैं। सैंकड़ों स्कूल बमबारी में बर्बाद हो चुके हैं। 2006 में 84 हजार लोग जिसमें 26 हजार महिलाएं और 33 हजार बच्चे डेरा बुगती और कोह्लू से पलायन कर चुके हैं।

- पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक (Human Rights Commission of Pakistan) पाकिस्तानी सेना की कार्यवाही में 2.5 लाख लोग डेरी बुगती से पलायन कर चुके हैं और 10 हजार लोग भूखमरी का शिकार हुए हैं।

- पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के मुताबिक (जून 2011 की रिपोर्ट में कहा है कि 140 लापता व्यक्तियों के शव जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच बरामद हुए हैं।हाल ही में सुरक्षा बलों की तरफ से बलूच लोगों और नेताओं की हत्याओं ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या है बलूचिस्तान का पूरा विवाद और यहां के लोग क्यों चाहते हैं पाकिस्तान से आजादी...

- बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान के बीच का हिस्सा है।  - बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तानी प्रांत का 44 फिसदी हिस्सा है। - पर यहां पाक की कुल आबादी के मात्र 5 फिसदी लोग रहते हैं। - 19 करोड़ पाक आबादी में से 1.3 करोड़ लोग ही यहां रहते हैं। - पाकिस्तान में 7 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 40 लाख वोटर बलूचिस्तान में हैं। - नेशनल एसेंबली की 342 सीटों में बलूचिस्तान से सिर्फ 17 सीटें बलूचिस्तान में हैं। - जिनमें से 14 सामान्य हैं और तीन महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। - बलोच, बलूचिस्तान प्रान्त में रहने वाले मुख्य लोग है।  - इनकी भाषा भी बलोच है जो ईरानी भाषा से मिलती जुलती है। - इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक मिलती है  - जो वैदिक संस्कृत की बड़ी करीबी भाषा मानी जाती है। - बलोच लोग कबीलों में पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं। - बलूचिस्तान में खनिज और गैस प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। - इसी पर कब्जे को लेकर पाकिस्तानी सेना वहां जुर्म ढहा रही है। - 1948, 1958-59, 1962-63 और 1973-77 में यहां सैन्य अभियान चलाए। - कब्जे के बावजूद यह सूबा है पूरी तरह से कभी पाक हुकूमत के कब्जे में नहीं रहा। - बलूचिस्तान में पाकिस्तान सरकार की नहीं कबीलाई सरदारों की चलती है।  - धूल भरी आंधी, रेतीला इलाका, बंजर जमीन और कबीले ये बलूचिस्तान की असली तस्वीर है।  - इन कबीलों का अपना कानून है, इसमें हाथ के बदले हाथ और सिर के बदले सिर लेने की परंपरा है।  - आजादी की मांग तो 1948 से ही उठाई जा रही है, लेकिन 2000 के बाद से आग और भड़क गई। - यही वजह है कि कई बलूच नेताओं को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ रही है।