भारत ने कर दिया ये काम तो रेगिस्तान में बदल जायेगा पाकिस्तान

नई दिल्ली (22 सितंबर): उरी हमले के बाद पाकिस्तान को घुटनों के बल गिरने को मजबूर कर देगा। इसी रणनीति के तहत एक नये कदम का इशारा भी किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने सिंधु जल समझौते पर कहा- किसी भी समझौते के लिए आपसी भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। जब उनसे इसके मायने पूछे गए तो विकास ने कहा- डिप्लोमैसी में हर चीज को विस्तार से नहीं बताया जाता। 

- 1960 के सिंधु जल समझौते के मुताबिक, पाकिस्तान को भारत से बहने वाली छह नदियों का पानी मिलता है।  - इसी पानी से पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं और सिंचाई की जा रही है।

- मीडिया ने विकास स्वरूप से सिंधु जल समझौते को रद्द किए जाने संबंधी खबरों पर सरकार का पक्ष जानना चाहा।  - इस पर स्वरूप ने कहा- किसी एक तरफ से सहयोग इस तरह के समझौतों में काम नहीं करता। 

-  विकास स्वरूप ने सरकार के इरादों की तरफ इशारा करते हुए कहा- इस समझौते की प्रस्तावना में ही साफ लिखा है कि ये गुडविल पर काम करेगा। 

- मीडिया ने जब ये पूछा गया कि क्या भारत इस समझौते को रद्द कर सकता है? विकास स्वरूप ने कहा- इस बारे में विस्तार से नहीं बताया जा सकता। डिप्लोमैसी में हर चीज को समझाया नहीं जाता।

- सिंधु जल समझौता  1960 में हुआ। इस पर जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान ने दस्तखत किए थे। 

- समझौते के तहत छह नदियों- बीस, रावी, सतलज, सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी भारत और पाकिस्तान को मिलता है। 

- पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारत उसे समझौते की शर्तों से कम पानी देता है। वो दो बार इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में शिकायत भी कर चुका है। 

- समझौते के मुताबिक, सतलज, व्यास और रावी का अधिकतर पानी भारत के हिस्से में रखा गया जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।

- इस समझौते को भारत अगर रद्द कर देता है तो वहां का एक बड़ा हिस्सा प्यासा रह जाएगा। सिंधु और बाकी पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं। 

- पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने पिछले दिनों कहा था कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा।

- सिंधु, झेलम और चेनाब में वाटर बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। बिजली की पाकिस्तान में वैसे ही भारी परेशानी है। अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में बिजली को लेकर हाहाकार मच सकता है। 

- समझौता रद्द होने पर बिजली तो कम होगी ही पाकिस्तान के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इससे निपटना करीब-करीब नामुमकिन हो सकता है। 

- पहले ही कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान को फाइनेंशियल लेवल पर ये झटका सहन करना बेहद कठिन होगा।