अमेरिकी सांसदों ने बदला पाला, मिलती रहेगा पाक को आर्थिक मदद

वॉशिंगटन (18 जून): पिछले दिनों खबर आ रही थी कि शायद अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद को कम किया जा सके, लेकिन अब लगा है कि ऐसा नहीं होगा। क्‍योंकि अमेरिका की ओर से पाक को दी जाने वाली मदद में कटौती से जुड़े दो विधायी संशोधन अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में गिर गए।

अमेरिकी सांसदों ने कहा कि परमाणु हथियारों से संपन्न एक देश के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी है, फिर भले ही वह आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में ज्यादा कुछ न कर रहा हो। सदन में गिरने वाला पहला संशोधन कांग्रेस सदस्य टेड पो द्वारा लाया गया था। इसमें उन्होंने गठबंधन सहयोग कोष (सीएसएफ) में से पाकिस्तान को दी जाने वाली 90 करोड़ डॉलर की मदद को कम करके 70 करोड़ डॉलर करने की मांग की थी। यह संशोधन सदन के पटल पर 191-230 मतों के अंतर से गिर गया। दूसरा संशोधन कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबचर का था, जिसमें पाकिस्तान को मदद उपलब्ध करवाने में कोष का इस्तेमाल न करने की मांग की गई थी। यह संशोधन 84-236 मतो के अंतर से गिरा।

पाकिस्तान द्वारा ‘‘युद्ध में गलत ओर खड़ा’’ होने की दलील देते हुए पो ने कहा कि यदि उनका बस चलता तो वह पाक को दिए जाने वाला सारा धन रोक देते। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष महोदय, इसके पीछे एक वजह है। पाकिस्तानियों ने ओसामा बिन लादेन को छिपाया और हमें पाकिस्तान के अंदर जाकर उसे निकालना पड़ा। उन्होंने उसे छिपाया और यह बात दुनिया जानती है। वहीं ओसामा बिन लादेन को छिपाए जाने की घटना के बाद पाकिस्तान में सीआईए के सेक्शन प्रमुख को जहर दे दिया जाता है। वह अमेरिका वापस आ गए। उनका और सीआईए का मानना है कि उन्हें पाकिस्तानी आईएसआई ने जहर दिया। मैं उनसे सहमत हूं।

पो ने कहा कि पाकिस्तान हर किसी के साथ खेल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा धन लेकर यह आईएसआई के हाथों से होता हुआ अंतत: उस तालिबान और अफगानिस्तान के हाथ में जाता है जो अमेरिकियों की हत्या कर रहे हैं। अपने संशोधन के लिए सहयोग मांगते हुए कांग्रेस सदस्य रोहराबेचर ने कहा कि पाकिस्तान को अमेरिकी मदद जारी रखने से उस सरकार को मजबूती और बढ़ावा मिलेगा, जिसने अपने ही लोगों के खिलाफ अपराध किए हैं। उन्होंने कहा तब हम दरअसल एक ऐसी सरकार को धन दे रहे होंगे, जो आतंकवाद और आतंकी संगठनों की मदद से न सिर्फ अपनी जनता का दमन करती है बल्कि अमेरिका और अन्य स्थानों की जनता को खतरे में भी डालती है।