पाक में भारत की बेटी गीता को पनाह देने वाले ईधी का निधन

नई दिल्ली (9 जुलाई): लंबे समय तक पाकिस्तान में रहने वाली भारत की बेटी गीता को पनाह देने वाले ईधी फाउंडेशन के संस्थापक समाजसेवी अब्दुल सत्तार ईधी का निधन हो गया है। ईधी ने शुक्रवार देर रात 88 वर्ष की आयु में कराची में आखिरी सांस ली।

ईधी के पुत्र फैसल ईधी ने कहा कि उनके पिता की इच्छा थी कि उन्हें उन्हीं कपड़ों में दफनाया जाए, जो वह पहने हों। फैसल ने बताया कि उनके पिता ने पच्चीस साल पहले ईधी विलेज में अपनी कब्र तैयार की थी। उन्हें वहीं दफनाया जाएगा। फैसल ने उनकी मौत के बाद अस्पताल के बाहर कहा कि उनके पिता की डायलिसिस के दौरान सांस रुकने लगे थी, जिसके बाद उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। उनकी इच्छा के मुताबिक उनकी आंखें दान कर दी गई हैं।

2013 में ईधी की दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया था। खराब स्वास्थ्य के चलते किडनी का ट्रांसप्लान्ट नहीं कराया जा सका। उनका सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी एंड ट्रांसप्लांटेशन में इलाज चल रहा था। जून में ईधी ने पूर्व राष्ट्रपति आसिफ जरदारी के उस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था जिसमें जरदारी ने उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने का प्रस्ताव किया था। ईधी का कहना था कि वे पाकिस्तान में ही इलाज कराएंगे, विशेषकर सरकारी अस्पताल में।

आपको बता दें कि गीता जब 8 साल की थी तो उसे समय लाहौर रेलवे स्टेशन पर उसे समझौता एक्सप्रेस में अकेला बैठा पाया था। उसके बाद उसे अब्दुल सत्तार ईधी की ईधी फाउंडेशन ने गोद ले लिया था। गीता को 15 साल के बाद भारत पहुंचे में ईधी फाउंडेशन ने काफी मदद की थी।

जीवन परिचय: अविभाजित भारत के गुजरात में 1 जनवरी 1928 को जन्मे ईधी 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे। उनकी मां को पैरालेसिस हो गया था और वे मानसिक रूप से बीमार हो गई थीं। इस घटना ने उनका पूरा जीवन ही बदल दिया। सरकार की तरफ से कोई मदद न मिलने से वे इतने मर्माहत हुए कि उन्होंने खुद को परोपकार में लगा दिया। उन्होंने उच्च आदर्शों से प्रेरित होकर 1951 में कराची की संकरी गली में क्लीनिक खोला।

ईधी और उनकी टीम अनाथों, असहायों के लिए मैटरनिटी होम, वृद्धों के लिए वृद्धाश्रम बनवाते रहे। उनका मकसद था, जो लोग अपनी मदद खुद नहीं कर सकते, उनकी मदद करो। ईधी ने वर्ष 1957 में कराची में एम्बुलेंस सेवा और डिस्पेंसरी सेवा शुरू की थी। आज उनके फाउंडेशन के पास 1,500 एंबुलेंस हैं। पाकिस्तान के चारों प्रांतों में उनकी एंबुलेंस सेवा बीमारों को मदद पहुंचा रही है। ईधी फाउंडेशन से अनाथ बच्चों-बुजुर्गों के लिए केंद्र का संचालन भी किया जा रहा है।