भिखारी पाकिस्तान ने सऊदी के सामने फैलाए हाथ, मिली इतने रुपये की भीख

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 दिसंबर): भले ही पाकिस्तान के नेता और सेना भारत को मुंहतोड़ जवाब देने की बात कहते हुए टीवी पर नजर आ जाते हो, लेकिन उस देश की हालत पूरी तरह से एक भिखारी की हो चली है। पाकिस्तान की इमरान सरकार के पास देश चलाने के लिए भी पैसे नहीं है और इसीलिए उसने कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आगे हाथ फैलाए थे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इस बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं किया है।

कुछ समय पहले तक पाकिस्तान को अमेरिका आर्थिक मदद करता था, लेकिन उसने भी उसके रवैया को देखते हुए यह बंद कर दी। इसके बाद पाकिस्तान ने चीन के आगे पीछे घूमना शुरू कर दिया। चीन ने भी उसे मोटी ब्याज दर पर लोन दिया, लेकिन अब लगता है कि वह उसे चुका ही नहीं पाएगा और चीन आने वाले समय में ग्वादर बंदरगाह पर कब्जा कर सकता है। जिसको देखते हुए पाकिस्तान की हिम्मत नहीं है कि वह अब चीन से पैसे मांगे।

हालांकि इस सबके बाद पह सऊदी अरब के पास गया, जिसने से मदद की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि पाकिस्तान को सऊदी अरब से राहत पैकेज की दूसरी खेप मिल गई है। एक अरब डॉलर का सउदी पैकेज मिलने के बाद पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) बढ़कर 9.26 अरब डॉलर हो गया है। पिछले महीने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने इस बात की पुष्टि की थी कि उसे सउदी अरब से एक अरब डॉलर मिले हैं।

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सऊदी अरब यात्रा के दौरान कहा था कि पाकिस्तान को सऊदी अरब से एक बेहतरीन राहत पैकेज मिला है और अब उनका देश आर्थिक संकट का सामना कर सकेगा। उन्होंने कहा था कि अगर आईएमएफ से राहत पैकेज नहीं मिलता है, तो भी दिक्कत नहीं आएगी। इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान अपने मित्र देशों से ऐसा पैकेज जुटा लेगा। इमरान खान ने कहा, 'सऊदी अरब और यमन के बीच टकराव को टालने में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हम मुस्लिम देशों को एकजुट कर रहे हैं।'

आपको बता दें कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 8 अरब डॉलर के ऋण पैकेज की मांग कर रहा है। पाकिस्तान की ओर से यह अब तक का सबसे बड़ा ऋण पैकेज मांगा गया है। हालांकि आईएमएफ ने इस पैकेज को मंजूरी नहीं दी है। पाकिस्तानी समाचार पत्र की खबर में कहा गया है कि आईएमएफ पाकिस्तान के सामने कड़ी शर्तें रख सकता है। पाकिस्तान इन प्रतिबंधों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ऋण की मांग कर सकता है और यह पैकेज 12 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।