'मोदी से निपटने में पाकिस्तान नाकाम'


नई दिल्ली(30 जून): अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को उसकी धरती से आतंक रोकने की ताकीद के बाद अब भारत के इस पड़ोसी मुल्क में उसकी नीतियों पर ही सवाल उठने लगे हैं।


- पाकिस्तान के एक समाचारपत्र ने शुक्रवार को कहा है कि कश्मीर विवाद पर अमेरिका का भारत के साथ आने का फैसला यह संकेत देता है कि पाकिस्तान पीएम 

मोदी के नेतृत्व वाले भारत के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्वीकार करवा पाने में अक्षम साबित हुआ है।


- समाचारपत्र 'डॉन' ने संपादकीय में लिखा है, 'ऐतिहासिक तौर पर, देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए अमेरिका, भारत और पाकिस्तान को बातचीत के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। लेकिन यदि अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ है तो उस प्रोत्साहन का अब कोई अर्थ नहीं रह गया है।'


- समाचारपत्र ने कहा है कि यह पाकिस्तान के सामने कुछ खास चुनौतियां पेश करता है, जिसमें यह चुनौती भी शामिल है कि वह जम्मू-कश्मीर पर भारत के खिलाफ दुनिया की राय को कैसे अपने पक्ष में करे। 'डॉन' के मुताबिक, जब कश्मीर की बात आती है, तो शायद इस्लामाबाद के दावे की जगह पाकिस्तान का आतंकवाद से भरा इतिहास दुनिया को अधिक दिखाई पड़ता है।


- लेख के मुताबिक, राज्य में अलगाववादी आंदोलन शुरू होने के 30 वर्षों बाद भारत ने उस विचार को पुन: अपना लिया है कि कश्मीर का दमन किया जा सकता है। डॉन की यह टिप्पणी खास तौर से अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी और हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाउद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के संदर्भ में है।