कब तक खैर मनायेगी बकरे की अम्माः अक्टूबर में चीन के हाथों FATF की भेंट चढ़ेगा पाकिस्तान !

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (10 अगस्त): आतंकवाद को भारत और अफगानिस्तान जैसे देशों के खिलाफ स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करते आ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही बेहद खस्ताहाल है। ऊपर से उस पर फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। एफएटीएफ की तरफ से ब्लैकलिस्ट किए जाने से बचने के लिए इस्लामाबाद अब पेइचिंग की शरण में है। इसके अलावा, वह मलयेशिया और तुर्की से भी मदद की आस लगाए हुए है। एफएटीएफ अक्टूबर में पाकिस्तान की समीक्षा करेगा। उसने इस्लामाबाद को आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए 27 कदम उठाने को कहा था लेकिन पाकिस्तान ने प्रस्तावित कदमों में से आधे भी नहीं उठाए हैं और जो उठाए हैं, वे भी दिखावे के लिए। हैरत की बात तो यह है कि एफएटीएफ से इतर पिछले कई दिनों से वह कश्मीर में भारत सरकार के फैसले से बौखलाया हुआ है।

पड़ोसी देश की वित्तीय हालत काफी खस्ताहाल है। आलम यह है कि उसके खजाने में विदेशी पूंजी भंडार बस इतना बचा है कि महज दो महीनों के निर्यात के काम आ सकता है। इससे वहां भुगतान संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। संभावना है कि इस समीक्षा में पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया जाएगा। इसके बाद वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पाकिस्तान की पहुंच कम हो जाएगी और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा उसे दिए जा रहे 6 अरब डॉलर के कार्यक्रम पर भी असर पड़ेगा।

मामले की जानकारी रखने वालों के मुताबिक पाकिस्तान के समक्ष भुगतान का संकट मुंह बाए खड़ा है। पाकिस्तान की एक समाचार वेबसाइट 'द न्यूज डॉट कॉम' ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी खस्ताहाल वित्तीय हालत को देखते हुए चीन और 2 अन्य विकाशसील देशों से मदद मिलने की आस लगाए है,  इस बार एफएटीएफ की चेयर भी चीन के पास है, इसलिए पाकिस्तान को भरोसा है कि चीन उसे आउट ऑफ वे जाकर फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन एफएटीएफ के सदस्य देशों में भारत भी शामिल है और पाकिस्तान को अच्छी तरह पता है कि ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग रोकने के 27 मानकों की इस समीक्षा में अधिकतर मानकों पर वह असफल साबित होगा। खासतौर से भारत की हर कोशिश पाकिस्तान पर लगाम लगाने की होगी।

अमेरिकी और यूरोपीय देशों में आंतकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और आतंकवाद को सहारा देने वाले देशों पर लगाम लगाई जा रही है। इसके तहत पाकिस्तान को भी 27 कदम उठाने की सूची दी गई है, जिसमें आतंकवाद के वित्त पोषण की पहचान कर उसे रोकने और अवैध मुद्रा पर काबू पाने को कहा गया है। अगर पाकिस्तान इसे पूरा करने में नाकाम रहता है तो उसे ईरान और उत्तर कोरिया की तरह ही ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

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