पाकिस्तान में गुप-चुप हो रही है तख्ता पलट की तैयारी ? आर्मी चीफ के साथ खड़ा है चीन !

नई दिल्ली (1अगस्त): भ्रष्टाचार के आरोप में पाकिस्तान में नवाज शरीफ के इस्तीफे के बाद एक बार फिर सत्ता पर सेना को काबिज कराने की साजिश शुरु हो चुकी है। कहा तो यह भी जा रहा है कि ये साजिश उसी वक्त शुरु हो चुकी थी जब नवाज का जाना लगभग तय हो गया था। इस बार इस साजिश में पाकिस्तान का दोस्त चीन परोक्ष रूप से सक्रिय है। आर्मी के हाथ में एकबार फिर पाकिस्तान की कमान पहुंचाने के लिए परवेज़ मुशर्ऱफ भी बाहर से सक्रिय हैं। सीपेक की सुरक्षा के मुद्दे के बहाने चीन नवाज शरीफ के बजाय पहले आर्मी चीफ से सीधी बात करता रहा है। बीती 14 जुलाई को सीपेक को लेकर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बांटे गये एक पर्चे की घटना को चीन ने काफी संजीदगी से लिया था। चीन ने स्पष्ट तौर पर तत्कालीन नवाज सरकार को संकेत था कि सिविल गवर्नमेंट के सहारे सीपेक पर संकट आ सकता है।

इसके बाद आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और पाकिस्तान में तैनात चीनी अफसरों की कई बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों का असर इस्लामाबाद में पीएलए के 90 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिला। जनरल बाजवा ने इस मौके पर न केवल चीनी आर्मी की तारीफ के पुल बांधे बल्कि शी जिनपिगं की भी शान में कसीदे गढ़े और कश्मीर मुद्दे पर समर्थन की प्रशंसा की। इस कार्यक्रम में जनरल बाजवा की भाषा फौजी अफसर कम सदर-ए- हुकूमत जैसी ज्यादा थी। चीनी सेना और सरकार के साथ जनरल बाजवा के संबंधों पर पाकिस्तान के सियासी दल फिल्हाल चुप हैं। नवाज शऱीफ के बाद प्रधानमंत्री बनने वाले शाहिद खाकन अब्बासी के खिलाफ एनएबी को अगर एलएनजी घोटाले के सुबूत मिल जाते हैं तो पाकिस्तान के सियासी हालात और बिगड़ सकते हैं। उन परिस्थितियों में अपने हित सुरक्षित रखने के लिए चीन ने भी आर्मी चीफ बाजवा को अभी से हवा देना शुरु कर दिया है।