भारत के इस कदम से भूखा मर जाएगा चीन, देश में भी उठने लगी है मांग


पंकज मिश्रा, न्यूज 24, नई दिल्ली (14 मार्च): चालबाज चीन भारत की तरक्की से घबराता है। लिहाजा वो ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता जिससे हिंदुस्तान परेशान हो और उसकी मुश्किलें बढ़े। इसी कड़ी में ड्रैगन ने भारत के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक और अंतर्राष्ट्रीय आतंकी मसूद अजहर का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बचाव किया है। चीन ने एकबार फिर भारत के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के उस मुहिम को झटका दिया है जिसमें मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाना था। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का ना सिर्फ विरोध किया है बल्कि अपने वीटो के अधिकार का भी इस्तेमाल किया है। पिछले 10 साल में यह चौथी बार है जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकी मसूद अजहर के लिए दरियादिली दिखाई है। पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन एवं अमेरिका की ओर से रखा गया था।

इसमें कोई शक नहीं है कि चीन का पाकिस्तान में निहित स्वार्थ है और उसे पाकिस्तानी आतंकियों से भी डर है। लिहाजा दुनिया की अनदेखी कर चीन आंख बंदकर पाकिस्तान को खुश करने की कोशिश में जुटा रहता है। दरअसल विस्तारवादी और व्यापारी चीन की नजर पाकिस्तान के संसाधनों के साथ-साथ उसकी जमीन पर भी है। चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC चीन की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड यानी BRI का अहम हिस्सा है। BRI के तहत चीन सड़क, रेल और समुद्रीय मार्ग से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाने की कोशिश में जुटा है। चीन को डर है कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ किसी भी फैसले से उसका महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट CPEC प्रभावित हो सकता है। CPEC ना केवल PoK और गिलिगिट-बालटिस्तान से होकर गुजरता है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा के मनसेरा जिले में भी फैला हुआ है। गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा में ही बालाकोट स्थित है जहां पर जैश के कई आतंकी कैंप हैं। ऐसे में आतंकी मसूह अजहर के खिलाफ चीन के जाने का मतलब है कि जैश के आंतकी  CPEC को निशाना सकता है। लिहाजा चीन  CPEC को लेकर कोई जोखिम नहीं उठा सकता।

ऐसे में सवाल उठता है कि चीन की चालबाजी से भारत किस तरह से निपटे। आपको बता दें कि डोकलाम विवाद के वक्त हिंदुस्तान में चीनी उत्पाद के बहिष्कार की मांग तेज हो गई थी और बड़ी तादाद में लोग चीनी सामान का बहिष्कार भी करने लगे थे। एकबार फिर से ये मांग तेज होने लगी है। बड़ी तादाद में लोग चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग करने लगे हैं। इसी कड़ी में योगगुरु बाबा रामदेव ने ट्वीट किया है कि 'आतंकी मसूद अजहर समर्थक चीन का हमें राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक रुप से बहिष्कार करना चाहिए। चीन व्यवसायिक भाषा समझता है। आर्थिक बहिष्कार युद्ध से ज्यादा ताकतवर है।'


आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच मौजूदा वक्त में सालाना द्विपक्षीय व्यापार तकरीबन 90 अरब डॉलर का है। भारत चीन से तकरीबन 70 अरब डॉलर का निर्यात करता है जबकि महज 20 अरब डॉलर का निर्यात करता है। वर्तमान में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र है और भारत चीन का दसवां सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र है। ऐसे में अगर भारतीय चीनी सामानों का बहिष्कार करने लगें तो ड्रैगन को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है, इसे चीन इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। हालांकि ऐसा कर पाना भारत के लिए भी आसान नहीं होगा।