पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, आतंकी मसूद अजहर पर भारत की मुहिम को मिला 'चीनी' समर्थन

बीजिंग (6 जनवरी): आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे पर नापाक पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती है। पाकिस्तानी आतंकी सरगना मसूद अजहर को यूएन से आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयासों को मजबूती मिली है। दरअसल, भारत में रह चुके एक पूर्व चीनी राजनयिक ने अपने देश से अजहर पर यूएन में लगातार अड़ंगे को रोककर इस मसले पर स्टैंड बदलने को कहा है।


कोलकाता में चीन के काउंसिल जनरल रहे माओ सिवे ने कहा कि अजहर एक आतंकवादी है और चीन को अपने स्टैंड को ठीक करना चाहिए। सिवई ने सोशल मीडिया WeChat पर भारत-चीन के बीच अजहर के मसले पर चल रहे गतिरोध पर लिखे ब्लॉग में कहा कि चीन को अजहर के खिलाफ भारत की शिकायत का फायदा उठाना चाहिए और दोनों देशों को बीच संबंध ठीक करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने लिखा, 'अजहर को यूएन से आतंकी घोषित करने में चीन के अड़ंगे से भारत-चीन के बीच रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं।'सिवई 2007 से 2010 के बीच कोलकाता में चीन के काउंसिल जनरल रहे थे। उससे पहले सिवे नई दिल्ली में चीनी दूतावास में राजनयिक के तौर पर काम कर चुके हैं। सिवई जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में विजटिंग स्कॉलर भी रहे हैं।


गौरतलब है कि चीन ने पिछले साल 30 दिसंबर को यूएन में अजहर को आतंकियों की सूची में शामिल कराने की भारत की कोशिशों पर अड़ंगा लगा दिया था। चीन ने कुछ दिन पहले अजहर पर अपने रुख पर विचार करने का संकेत दिया था, लेकिन ऐन वक्त पर वह अपनी बात से पलट गया था।

भारत ने चीन के इस रवैये को आतंक के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड बताया था। भारत ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण आघात' करार दिया था। अजहर पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में चीन 1267 पाबंदी सूची में अजहर को डालने के भारत के आवेदन पर स्थगन लगाने वाला एकमात्र सदस्य देश है, जबकि अन्य 14 सदस्य भारत के पक्ष में हैं। इस लिस्ट में आतंकी अजहर के शामिल होने से उसपर दुनियाभर में कई तरह की पाबंदियां लग जाएंगी।