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हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलनः आतंकवाद पर पाकिस्तान अलग-थलग

नई दिल्ली (5 दिसंबर): हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में पाकिस्तान की रणनीति एक बार फिर चारों खाने चित सबित हुई। पाकिस्तान ने अपने प्रतिनिधि सरताज अजीज को एकदिन पहले इस सम्मेकन में भेजकर सबको चौंका दिया था लेकिन भारत की रणनीति के आगे उसकी एक न चली। आतंकवाद के  के मुद्दे पर भारत एक बार फिर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कामयाब रहा है। अमृतसर मेंहुई हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद ही मुख्य मुद्दा रहा। कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद को खत्म करने का संदेश देते हुए एक ऐंटी-टेरर प्रस्ताव पर सहमति बनी। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी की बात यह रही कि इस प्रस्ताव में

जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों और हक्कानी नेटवर्क का नाम शामिल किया गया है। हाई ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस की समाप्ति के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमृतसर घोषणा पत्र की जानकारी दी। घोषणा पत्र में कहा गया, 'आतंकवाद शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है, सभी तरह के आतंकवाद को खत्म किया जाना चाहिए जिसमें आतंकवाद को समर्थन और आर्थिक मदद मुहैया कराना भी शामिल है। हम अफगानिस्तान में तालिबान, आईएसआईएस/दाइश और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे सहयोगी संगठनों द्वारा की जा रही हिंसा को लेकर बहुत चिंतित हैं।'

अमृतसर घोषणा पत्र में आगे कहा गया, 'हम अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अफगानिस्तान की सरकार को अपना सहयोग करना जारी रखने की अपील करते हैं। हम आतंकवाद के हर रूप को खत्म करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाए जाने की मांग करते हैं। हार्ट ऑफ एशिया रीजन में आतंकवादियों की शरणस्थलियों और ठिकानों को तबाह करने और साथ ही उन्हें मिलने वाली आर्थिक और हर तरह की दूसरी मदद रोकने की मांग करते हैं।' 


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