कश्मीर में हिंसा भड़का रहा पाकिस्तान, आतंकियों को छोड़ेंगे नहीं हमारे जवान: राजनाथ सिंह

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (31 मार्च): कश्मीर को एक बार फिर हिंसा की आग में झोंकने की साजिश रची गई। शांत कश्मीर में एक बार फिर अशांति की चिंगारी सुलगाने की कोशिश की गई। मुठीभर आतंकवादियों के मददगार देशद्रोही पत्थरबाजों को आम कश्मीरियों की आड़ में सड़कों पर उतारा गया और ये सब हुआ पाकिस्तान की शह पर। जी हां एक बार फिर पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के लिए बड़ी साजिश रची है। पाकिस्तान की इस काली करतूत का खुलासा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज लोकसभा में किया। गृहमंत्री ने बताया कि कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ के दौरान पत्थरबाजी के बढ़ते मामलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तान के कुछ समूह कश्मीर के युवाओं को सेना पर पत्थरबाजी के लिए उकसा रहे हैं, ये समूह सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, व्हॉट्सएप) के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके भीड़ को इकट्ठा कर रहे हैं। इन पत्थरबाजों की वजह से कश्मीर में सेना को एक अजीबोगरीब हालात से जूझना पड़ रहा है। एक ओर हमारे जवान बरसती गोलियों के बीच आतंकियों से लोहा ले रहे हैं तो दूसरी ओर इन देशद्रोहियों के पथराव का भी सामना कर रहे हैं।


क्या कहा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने-

    * गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में खुलासा किया पत्थरबाजों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है।

    * गृहमंत्री ने बताया एंटी टेरर ऑपरेशंस के दौरान आतंकियों को भगाने की कोशिश की जाती है।

    * कोशिश पाकिस्तान में बैठे कुछ ग्रुप्स कर रहे हैं जो युवाओं को पत्थर फैंकने के लिए उकसा रहे हैं।

    * ये पाकिस्तानी ग्रुप्स भीड़ इकट्ठा करने के लिए सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।

    * राजनाथ ने कहा कि कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तान के ग्रुप्स द्वारा गुमराह किया गया है।

    * उन्होंने कश्मीर के युवाओं से अपील की कि वे पाकिस्तानी ताकतों के प्रभाव में न आएं।

    * साथ ही गृहमंत्री ने कहा आतंकवाद से जैसे निपटना चाहिए, वैसे हमारे जवान निपटेंगे।


जम्मू-कश्मीर के डीजीपी पत्थरबाजों को दे चुके हैं चेतावनी- गृहमंत्री से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद भी यह बात दोहरा चुके हैं। डीजीपी ने युवाओं से अपील की थी कि वे एनकाउंटर वाली जगहों से दूरी बनाए रखें। पाकिस्तान की शह पर युवाओं को मुठभेड़ की जगहों पर जाने के लिए उकसाया जा रहा है। डीजीपी ने कहा कि बंदूक से निकली गोली यह नहीं देखती कि वह किसे लगेगी।  जो नौजवान एनकाउंटर साइट पर आ रहे हैं वे जानबूझ कर आत्महत्या करने जा रहे हैं।


आर्मी चीफ ने भी कहा था पत्थर चलाओगे तो गोली खाओगे- शांत कश्मीर को अशांत करने वाले पत्थरबाजों को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने 16 फरवरी को कड़ी चेतावनी दी थी। सेना प्रमुख ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि कश्मीर में अगर पत्थर चलाओगे तो गोली खाओगे। जनरल रावत कि ये कड़ी चेतावनी घाटी में उन लोगों के लिए भी है, जो आतंकियों के खिलाफ सेना के ऑपरेशन में बाधा डालते हैं। ये मुठीभर आतंकियों के मददगार पत्थरबाज आम कश्मीरियों की आड़ में उतर आते हैं। जिसकी वजह से जवानों को एक अजीबोगरीब हालात से जूझना पड़ता है।


जम्मू-कश्मीर सरकार जारी कर चुकी है एडवाइजरी- जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने स्थानीय लोगों की तरफ से सुरक्षाबलों पर की गई पत्थरबाजी की निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकियों को लेकर यहां के लोगों में जो समर्थन है वह चिंताजनक है। मुफ्ती सरकार ने आम लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर 16 फरवरी को एक एडवाइजरी भी जारी की थी। जिसमें प्रशासन ने लोगों से आतंकवाद के खिलाफ अभियान वाली जगहों से दूर रहने को कहा था।


कैसे कश्मीरी युवाओं को भड़काती है पाक खुफिया एजेंसी ISI

कश्मीर में पाकिस्तान और ISIS के झंडे लहराना, आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सेना पर पत्थर फिकवाना यह सब हो रहा है पाकिस्तान की शह पर। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने आतंकी संगठनों का साथ मिलकर घाटी को जलाने की साजिश रची है। इसमें उसका साथ दे रहे हैं कश्मीर के कुछ देशद्रोही अलगाववादी संगठन। ये अलगाववादी जो ना तो 'कश्मीरियत' में यकीन करते हैं और ना ही जम्हूरियत और इंसानियत में। इनका मकसद होता है सिर्फ और सिर्फ घाटी के युवाओं को हिंसा के लिए भड़काना ताकि ये अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहें। इसके लिए इन देशद्रोहियों को मिलता है पाकिस्तान से पैसा। इस काले पैसे के दम पर ये अलगाववादी कश्मीर के गरीब और युवा बेरोरगारों को भड़काते हैं। पिछले साल NIA ने अपनी जांच में यह खुलासा किया था कि इन अलगाववादियों को 2015 में पाक से 38 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई थी। इस बार इन अलगाववादियों का मकसद घाटी में हिंसक माहौल पैदा कर पंचायत चुनाव को टलवाना था।


कश्मीर में विश्वास बहाली का फायदा उठा रहे देशद्रोही...

    * पत्थरबाजों के प्रति बरती जा रही नरमी सुरक्षा बलों पर भारी पड़ रही है।

    * आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद भड़की हिंसा में कई पत्थरबाज हुए थे गिरफ्तार।

    * पांच माह तक कश्मीर में उपद्रव के दौरान गिरफ्तार अधिकांश पत्थरबाज रिहा हो चुके हैं।

    * कम उम्र के 4506 पत्थरबाजों से मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।

    * लेकिन इस बीच ताजा हिंसा में सुरक्षा बलों के 100 से अधिक जवान घायल हो गए।

    * अभीतक पत्थरबाजी के कारण 6 हजार से ज्यादा जवान घायल हो चुके हैं।

    * सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 में हिंसा की 3,404 वारदातें दर्ज की गईं।

    * आंकड़ों के मुताबिक 2016 में आगजनी की 267 वारदातें हुईं थी।

    * कश्मीर में पत्थरबाजी की 2,690 वारदातें रिकॉर्ड की गईं।

    * नॉर्थ कश्मीर में 1248, साऊथ और सेंट्रल कश्मीर में 875 और 567 रिकॉर्ड हुई।

    * बारामूला के सोपोर में पथराव की 490 वारदातें हुईं।


300 सक्रिय आतंकियों को बचाने में लगे हैं ये देशद्रोही...

    * खुफिया सुत्रों के मुताबिक घाटी में 300 आतंकी सक्रिय हैं।

    * इन आतंकियों ने ग्रामीण इलाकों में शरणस्थली बनाया हुआ है।

    * ये आम जनता में घुल-मिल जाते हैं जिससे इनका पता नहीं लगता।

    * जब सर्च ऑपरेशन चलाया जाता है तो आतंकी बचने के लिए फायरिंग करते हैं।

    * आतंकियों को बचाने के लिए ये देशद्रोही सुरक्षा बलों को पत्थरों से निशाना बनाते हैं।