पाकिस्तानी शिशु बना भारत में सबसे कम उम्र का बोन मैरो डोनर

नई दिल्ली ( 16 दिसंबर ): आठ महीने का पाकिस्तानी बच्चा रायन भारत में सबसे कम उम्र का बोन मैरो (अस्थि मज्जा) दाता (डोनर) बन गया है। बैंगलोर के एक अस्पातल में उसने अपनी बोन मैरो स्टेम सेल्स को अपनी ढाई साल की बड़ी बहन जीनिया को दान की हैं। पाकिस्तान में सहीवाल की रहने वाली जीनिया को हीमोफेगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (एचएलएच) नामक दुर्लभ बीमारी थी। इसमें बोन मैरो ऐसे असामान्य सेल्स उत्पन्न करने लगती है जो सामान्य सेल्स को खाने लगते हैं। इसकी वजह से पीड़ित को तेज बुखार और खून की कमी हो जाती है। साथ ही उसका लिवर व स्पलीन (तिल्ली) का आकार भी बढ़ जाता है।

नारायणा हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के डॉ. सुनील भट्ट ने बताया कि यह बीमारी जानलेवा है और जीनिया के मामले में इसका एकमात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) ही था। जीनिया को जन्म से आंशिक अल्बीनिज्म बीमारी भी थी। लिहाजा जैसे ही पता चला कि बच्ची एचएलएच से पीड़ित है, तो उसके बाद उसके भाई के टेस्ट किए। इससे पता चला कि वह उसके लिए उपयुक्त डोनर हो सकता है। चूंकि, वह सिर्फ आठ महीने का है इसलिए बोन मेरो स्टेम सेल्स की पर्याप्त मात्रा हासिल करने के लिए दान की प्रक्रिया को कुछ हफ्तों के अंतराल पर दोहराना पड़ा।

डॉक्टरों ने बताया कि यह प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी की गई थी। जीनिया अब उस जानलेवा बीमारी से निजात पा चुकी है और पाकिस्तान जाकर अपना सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार है। उसके माता-पिता को भविष्य के लिए कुछ सलाह दी गई हैं जिनका घर पहुंचने के बाद पालन करना होगा। डॉक्टरों ने बताया कि रायन में भी 'असाधारण' रूप से सुधार हो रहा है और वह ठीक है।

भारत आने से पहले जीनिया का इलाज रावलपिंडी स्थित सैन्य अस्पताल में किया गया था। उसके पिता जियाउल्ला ने बताया कि भारत आने पर उन्हें सामान्य डर महसूस हुआ था, लेकिन यहां सब अच्छे हैं और उनका व्यवहार दोस्ताना है। उन्होंने बताया कि अब उनकी बेटी ठीक है और उसमें सुधार हो रहा है। कुछ इसी तरह की भावनाएं जीनिया की मां फरजीन ने भी व्यक्त कीं।