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पाकिस्तान पर 'तख्तापलट' की तलवार, जनरल लेगा इमरान से इंतकाम !

क्या पाकिस्तान (Pakistan) में एक और तख्तापलट (Takhta Palat) की तैयारी चल रही है ? क्या एक बार फिर पाकिस्तान (Pakistan) पर आर्मी (Army) की हुकूमत होने वाली है ? सवाल इसलिए क्योंकि जिस तरह पाकिस्तान (Pakistan) के आर्मी चीफ जनरल बाजवा (General Bajwa) को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में तकरार बढ़ रही है

Imran Khan- Bajwa

पंकज मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 नवंबर):  क्या पाकिस्तान (Pakistan) में एक और तख्तापलट (Takhta Palat) की तैयारी चल रही है ? क्या एक बार फिर पाकिस्तान (Pakistan) पर आर्मी (Army) की हुकूमत होने वाली है ? सवाल इसलिए क्योंकि जिस तरह पाकिस्तान (Pakistan) के आर्मी चीफ जनरल बाजवा (General Bajwa) को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में तकरार बढ़ रही है, उससे लगता है बहुत जल्द पाकिस्तान की सत्ता में कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है। यूं भी पाकिस्तान (Pakistan) में परदे के पीछे से आर्मी (Army) की हुकूमत चल रही है। इमरान खान (Imran Khan) तो सिर्फ सेना के लिए सत्ता का एक मोहरा हैं। ऐसे में अगर बाजवा (General Bajwa) पर पाकिस्तान (Pakistan) के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की तलवार गिरी तो जनरल लेगा इमरान (Imran Khan) से इंतकाम।

जिस जनरल बाजवा (General Bajwa) ने इमरान खान को पाकिस्तान के तख्ते ताऊस पर बिठाया अब वही बाजवा इमरान (Imran Khan) सरकार की तख्तापलट (Takhta Palat) की वजह बनने वाले हैं। जिस सेना (Army) की साजिश का सहारा लेकर इमरान ने पाकिस्तान के सिंहासन पर कब्जा जमाया अब वही सेना कप्तान की कुर्सी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। पाकिस्तान को कंगाली की हद तक पहुंचाने वाली इमरान सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और किसी भी वक्त पाकिस्तान की सत्ता एक बार फिर सेना के हवाले हो सकती है। इमरान सरकार की ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया है पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जिसने बाजवा (General Bajwa) का कार्यकाल बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाकर जनरल बाजवा (General Bajwa) और इमरान खान दोनों को सदमे में डाल दिया है। 

 

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दरअसल 29 नवंबर को जनरल बाजवा (General Bajwa) रिटायर हो रहे थे लेकिन इमरान सरकार ने उन्हें 3 साल का एक्सटेंशन दे दिया। इमरान सरकार ने अगस्त महीने में अधिसूचना को दी मंजूरी देते हुए नवंबर 2022 तक के लिए जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ा दिया। लेकिन बाजवा पर इमरान सरकार की यही मेहरबानी उनके गले की फांस बन गई । पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा और इमरान दोनों को झटका देते हुए इस पूरी प्रकिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पाकिस्तान की सुप्रीम अदालत ने बाजवा (General Bajwa) के कार्यकाल विस्तार की अधिसूचना को निलंबित करते हुए बाजवा समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया।

पाकिस्तान(Pakistan) के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की कोर्ट ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के तीन साल के कार्यकाल विस्तार को मंजूरी देने के प्रधानमंत्री के उस अधिकार पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति केवल अधिसूचना जारी कर सकते हैं। अदालत  (Supreme Court) ने कहा कि कार्यकाल के किसी भी विस्तार पर कोई भी अधिसूचना चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के वर्तमान कार्यकाल के पूरा होने के बाद ही जारी की जा सकती है, जो 28 नवंबर 2019 को समाप्त हो रही है। जबकि इमरान सरकार ने तीन महीने पहले ही ये फैसला लेते हुए अधिसूचना राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के पास भेजकर मंजूरी ले ली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इमरान खान को ऐसी क्या जल्दी थी कि उन्होंने अधिसूचना जारी करने के लिए बाजवा के कार्यकाल के पूरा होने तक का इंतजार नहीं किया।

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हालांकि पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल की ओर से कोर्ट में ये दलील दी गई कि बाजवा (General Bajwa) को एक्सटेंशन देने का फैसला देश के मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए लिया गया था पर कोर्ट ने ये दलील खारिज कर दी। आपको बता दें कि इमरान सरकार ने पाकिस्तानी सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए कई अफसरों को आउट ऑफ द टर्म प्रमोशन दे दिया है।

प्रमोशन का पंगा...

- ले. जनरल साहिर शमशाद मिर्जा चीफ ऑफ ज्वाइंट स्टाफ बने

- दो मेजर जनरल को प्रमोशन देकर लेफ्टिनेंट जनरल बनाया 

- अली आमिर अवान और मोहम्मद सईद को दिया प्रमोशन

- ले. जनरल मो. अमीर और नदीम ज़की को बड़ी जिम्मेदारी

- ले. जनरल शाहीन मज़हर और नौमान महमूद बने कमांडर

हालांकि ये सारे फैसले पाकिस्तानी सेना की ओर से लिए गए हैं पर इनके पीछे बाजवा और इमरान की रणनीतिक चाल बताई जा रही है। ऐसी खबर है कि बाजवा को दो दो बार एक्सटेंशन दिए जाने से पाकिस्तान सेना के टॉप आर्डर में भारी असंतोष है क्योंकि इससे जनरल बनने की कतार में खड़े सीनियर अफसर का रास्ता रुक गया। ऐसा कहा जा रहा है कि बाजवा (General Bajwa) का कार्यकाल बढ़ाए जाने से पाक सेना में गहरा असंतोष है, क्योंकि उसकी वजह से जुबैर हयात समेत कई बड़े अधिकारियों का ऑर्डर ऑफ प्रमोशन गड़बड़ा गया । दरअसल बाजवा के बाद जनरल जुबैर महमूद हयात ही पाक आर्मी के चीफ जनरल बनने के हकदार थे पर इमरान सरकार ने बाजवा को एक्सटेंशन देकर हयात की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उसके बाद हयात ये मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट  (Supreme Court) पहुंचे लेकिन 27 नवंबर को हयात रिटायर हो गए और उनके बदले नदीम रजा को ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टॉफ कमिटी का अध्यक्ष बना दिया गया।

ऐसा माना जा रहा है कि जनरल हयात की शह पर पाक सेना में असंतोष गहराया है। इतना ही नहीं कट्टरपंथी नेता फजलुर रहमान को जनरल हयात का समर्थन प्राप्त है। बताया जा रहा है कि इमरान सरकार की तख्तापलट की ताक में जनरल हैं। हालांकि इमरान सरकार के लिए खतरा दोनों तरफ से है। बाजवा और हयात जैसे जनरल से। और फजलुर जैसे कट्टरपंथी विरोधियों से भी। कहा जा रहा है घरेलू मोर्चे पर खुद को चौतरफा घिरते देखकर ही इमरान ने बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया। कहा जा रहा है कि जनरल हयात जैसे पाक सेना के बड़े अफसरों की शह पर ही मौलाना फजलुर रहमान ने इमरान सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है तो क्या घरेलू मोर्चे पर बढ़ते असंतोष को दबाने के लिए इमरान ने बाजवा का कार्यकाल बढ़ाया ?

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आपको बता दें कि पाकिस्तान में इमरान सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का दावा करते हुए कट्टरपंथी नेता फजलुर रहमान ने आजादी मार्च शुरू किया था। जिसके तहत कराची से इस्लामाबाद तक सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के लिए विशेष रूप से कई कंटेनरों का इस्तेमाल किया गया जिसमें बैठकर मौलाना के समर्थकों ने इस्लामाबाद तक सड़क जाम करने की कोशिश की लेकिन सेना और पुलिस की मदद से इमरान सरकार ने आंदोलनकारियों को पीछे धकेल दिया ।

मौलाना फजलुर रहमान ने इमरान सरकार के खिलाफ जोर शोर से आजादी मार्च शुरू किया था पर इसे वो सफलता नहीं मिली जिसका दावा किया जा रहा था। हालांकि धर्मगुरु से नेता बने मौलाना फजलुर रहमान ने अब इमरान खान पर फिर से हमला करते हुए उन्हें पाकिस्तान का पाकिस्तान का गोर्बाचेव बताया है और दावा किया है कि इमरान सरकार के पास अब गिनती के दिन बचे हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फज्ल के नेता फजलुर रहमान ने मंगलवार को दक्षिणी खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू शहर में धरना-प्रदर्शन किया और विपक्ष के नेताओं को चोर कहने के लिए इमरान खान पर निशाना साधा ।

 

मौलाना के आंदोलन को शुरू-शुरू में पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं ने भी समर्थन दिया था। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग नवाज के नेता इमरान सरकार के खिलाफ मौलाना के साथ खड़े दिखाई दिए, पर बाद में वो भी पीछे हट गए। जिसके पीछे पाक आर्मी की खौफ को वजह माना जा रहा है। पर अब तक अपने विरोधियों को साम दाम दंड भेद से साधते आए इमरान खान के लिए अब सेना में भड़की असंतोष की चिंगारी से निपटना मुश्किल दिख रहा है । ऐसा माना जा रहा है कि बाजवा हो या हयात या फिर कोई दूसरा जनरल इमरान सरकार की लाचार और कमजोर स्थिति को देखते हुए पाक सेना वहां कभी भी तख्तापलट करने का बड़ा कदम उठा सकती है ।

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