सामने आई पाक की दरिंदगी, 324 लोगों को दी गई मौत की सजा

नई दिल्ली ( 15 अक्टूबर ) : पाकिस्तानी सेना द्वारा बर्बरता पूर्वक बलूचिस्तान में की जा रही कार्रवाई के खिलाफ वहां के लोगों की सेना और सरकार के खिलाफ आंदोलन की तस्वीरें आती रहती हैं। वहां के लोगों का सेना और सरकार पर आरोप है कि वह उनके ऊपर अत्याचार कर रही है और वहां के लोगों की हत्या कर रही है. बलूचिस्तान के लोगों की आवाजें दबा रही है और वे पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं।  अब वहां के मानकाधिकार आयोग ने भी इस मुहर पर लगा दी है। 

पाकिस्तानी सेना पर लग रहे बर्बरता के आरोपों के बीच पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट ने भी पाक सेना की पोल खोल दी है। इसके मुताबिक 324 ऐसे लोगों को मौत की सजा दे दी गई, जिनका आतंकवाद से कोई नाता नहीं था। इसके अलावा 8 हजार कैदी मौत के इंतजार में हैं। रिपोर्ट में बलूचिस्तान को लेकर भी चिंता जताई गई है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने 2015 की अपनी रिपोर्ट हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सौंप दी है। आयोग ने यह भी कहा है कि जबरन गायब किए जाने के 1, 390 केस कमिशन ऑफ इन्क्वॉयरी के सामने पेंडिंग हैं। इनमें से कम से कम 151 मामले बलूचिस्तान के हैं, जो 2015 में जनवरी से नवंबर के बीच दर्ज किए गए।

पाकिस्तान की नई आतंकरोधी रणनीति से 'जबरन गायब' किए जाने के मामलों में इजाफा हुआ है, विशेषकर बलूचिस्तान प्रांत में। 2014 के अंत में लागू किए गए प्रोटेक्शन ऑफ पाकिस्तान ऐक्ट (पीपीए) ने स्थिति को और बदतर कर दिया। पीपीए ने सुरक्षाबलों को यह अधिकार दे दिया कि किसी संदिग्ध को 90 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। हिरासत में लिए जाने के लिए परिवार को बताने या जरूरी प्रक्रिया के पालन की भी जरूरत नहीं है। 

सिंध रेंजर्स को ऐंटी टेररेजम ऐक्ट (एटीए) 1997, के तहत शहरी इलाकों में भी कार्रवाई का अधिकार दे दिया। इसके बाद कराची में जबरन गायब किए जाने के मामले बढ़ गए। रेंजर्स जिन लोगों को उठाते हैं उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मौलिक अधिकार मिले इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा के 58 मामले दर्ज हुए। इनमें सैकड़ों लोग मारे गए और कहीं ज्यादा घायल हुए। रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों और बलूचिस्तान में जारी क्रूरता पर चिंता जताई गई है। इसके मुताबिक, बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने, हिरासती मौत और क्रूरता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

एचआरपीसी के मुताबिक, 2015 में पुलिस एनकाउंटर में 2,108 पुरुष और 7 महिलाओं की जान गई। 939 महिलाएं यौन हिंसा की शिकार हुईं। 143 महिलाओं पर ऐसिड अटैक हुआ। आयोग के मुताबिक, बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति बहुत खराब है। मई 2013 चुनाव के बाद भी वहां सेना ही अहम फैसले कर रही है। सिविल सोसायटी और मीडिया को हिंसा कवरेज की से रोका जा रहा है।