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पाकिस्तान का एक बड़ा झूठ दुनिया के सामने आ गया...

नई दिल्ली (22 जून): पाकिस्तान का एक बड़ा झूठ दुनिया के सामने आ गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने अमेरिकी रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि पाकिस्तान उत्तर कोरिया को लगातार परमाणु मैटेरियल उपलब्ध करा रहा है। इस खबर के आने के बाद पाकिस्तान का एनएसजी में शामिल होने का दावा कमजोर पड़ सकता है। अमेरिका ने इस बारे में सारे सबूत NSG के सदस्य देशों को दे दिए गए हैं।

उत्तर कोरिया के 'सनकी' तानाशाह किम जोंग की सनक की कोई सीमा नहीं। एक सनकी जो हमेशा दुनिया की तबाही का प्लान तैयार करता रहता है, वो सनकी हमेशा अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाता रहता है। इस सनकी तानाशाह के शस्त्रागार में दुनिया की तबाही का हर खतरनाक हथियार मौजूद है। इसके पास हाइड्रोजन बम और परमाणु बम से लेकर अमेरिका तक मार करनेवाली मिसाइलें भी मौजूद हैं।

किम जोंग की मिसाइलें वाशिंगटन डीसी तक मार करने की कुव्वत रखती हैं। लेकिन अब किम की परमाणु हथियारों की पोल खुल चुकी है। जिस परमाणु हथियारों के दम पर किम उछलता है वो पाकिस्तान से उत्तर कोरिया को मिले है। एक अमेरिकी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान लगातार उत्तर कोरिया को परमाणु मैटेरियल बेच रहा है। किम हथियारों की सनक को पूरा करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाता है और पाकिस्तान पैसा लेकर किम की सनक को पूरा कर रहा है।

पाकिस्तान का परमाणु ऊर्जा आयोग मोनेल और इनकोनेल जैसे प्रतिबंधिक परमाणु मैटेरियल उत्तर कोरिया को मुहैया करा रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने किम को जो परमाणु मैटेरियल उपलब्ध कराए हैं वो दरअसल चीन के हैं। चाइना की एटामिक एनर्जी अथॉरिटी को एक लिखित शिकायत मिली थी। बीजिंग सनटेक टेक्नॉलिजी लिमिटेड़ ने पाकिस्तान को जो मैटेरियल सप्लाई किए वो पाकिस्तानी अथॉरिटी ने उत्तर कोरिया भेज दिए हैं।

चीन की ओर से इस खबर को दबा दिया गया क्योंकि अगर ये खबर फैल जाती तो चीन की पाकिस्तान के एनएसजी ग्रुप में शामिल करवाने की कोशिशों को झटका लगता। लेकिन साउथ कोरिया से ये खबर लीक हो गई और पश्चिमी देशों तक पहुंच गई। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान उत्तर कोरिया को चीन को ऐसे उपकरण दे रहा है जो परमाणु हथियार बनाने में सीधे मददगार हैं और ये सभी उपकरण चीन से पाकिस्तान को मिले हैं।

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से 2015 के बीच उत्तर कोरिया के दो डिप्लोमेट 8 बार पाकिस्तान जा चुके हैं। ये दोनों डिप्लोमेट तेहरान में नॉर्थ कोरिया एंबेसी में तैनात हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों डेप्लोमेट ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर कार्यक्रम में लगे कई अधिकारियों से मुलाकात की। ये मुलाकात इस्लामाबाद और कराची में हुई। दरअसल पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के बीच टेक्नॉलिजी का लेन-देन कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान पर उत्तर कोरिया को पहले भी न्यूक्लियर टेक्नॉलिजी बेचने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के पितामह अब्दुल कादिर खान खुद भी इस बात का खुलासा कर चुके हैं।

कोरिया ने 1985 में परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसलिए वो वह परमाणु हथियार डेवलप नहीं कर सकता था। 1996 में उसने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया, समझौते के मुताबिक पाकिस्तान ने लंबी दूरी की मिसाइल की तकनीकी उत्तर कोरिया से ली बदले में उसे परमाणु तकनीक उपलब्ध कराई।

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल का दिर खान पर उत्तर कोरिया को यूरेनियम को प्योरिफाई करने वाले यंत्रों की डिजाइन बेचने के भी आरोप लगे। जिसके बदले में उत्तर कोरिया से मिली लंबी दूरी की मिसाइल की तकनीकी के जरिए पाकिस्तान ने मध्यम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल गौरी विकसित किया।


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