CPEC से चीन को होगा बंपर फायदा, पाक को उठाना पड़ेगा नुकसान


नई दिल्ली (2 अगस्त):
भले ही चीन CPEC को लेकर पाकिस्तान को भी फायदा होने की बात करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान के कई ऐसे व्यक्ति हैं जो इससे केवल चीन के लिए ही फायदेमंद बताते हैं। यह हाइवे 1300 किलोमीटर लंबा है, जो चीन के सुदूर पश्चिमी शहर कशगर से होते हुए यह हिमालय की ऊंची चोटियों से गुजरता है।

चीन ने इस निर्माण में हजारों करोड़ का निवेश किया है। हालांकि चीन की तरफ से काम कर रहे कई पाकिस्तानी बिजनसमैन का मानना है कि इससे केवल चीन को ही फायदा होगा। पाकिस्तानी बिजनसमैन मुराद शाह ने कहा, 'चीन कहता है कि हमारी दोस्ती हिमालय की चोटी से भी ऊंची है और समुद्र की गहराईयों से भी गहरी, लेकिन इसमें दिल तो है ही नहीं।' शाह चीनी इलाके में अपनी दुकान चलाते हैं। उन्होंने कहा, 'इससे पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होने वाला है। इससे केवल चीन की विकास को ही गति मिलेगी।'

2013 में पेइचिंग और इस्लामाबाद के बीच 46 अरब डॉलर का समझौता हुआ था, जिसमें CPEC के साथ परिवहन और ऊर्जा संरचना बनाने पर दस्तखत हुए थे। काराकोरम हाइवे के नाम से मशहूर इस सड़क को चीन ने विकसित करने की जिम्मेदारी उठाई है। जहां दोनों देश इसे फायदे वाला बता रहे हैं। वहीं डेटा कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा चीन को किया जाने वाले एक्सपोर्ट में 2016 के दूसरे हाफ में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इंपोर्ट में 29 फीसदी का उछाल आया है।

मोहम्मद नामक एक बिजनसमैन ने कहा, 'अगर आप चीन से कुछ लाते हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पाकिस्तान से आयात किए गए सामान पर टैरिफ घोषित नहीं है। आज यह 5 प्रतिशत है, कल यह 20 प्रतिशत हो सकता है। कुछ समय बाद वह कह सकते हैं कि इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है।' 3 साल पहले शाह को एक ब्लू स्टोन के लिए 8-15 युआन/किलो चार्ज देना पड़ा था। अब ड्यूटी बढ़कर 50 युआन/किलो तक पहुंच गया है।