पाकिस्तान में 'आज़ादी' पर कत्ल-ए-आम

नई दिल्‍ली (10 मार्च): देशविरोधी बातें करने वाले सवाल पूछने पर उसे अभिव्यक्ति की आजादी कहते हैं। कन्हैया कश्मीर में सेना पर रेप का आरोप लगाता है। लेकिन पाकिस्तान में आजादी की आवाज उठाने वालों को वहां फौज सिर पर गोली मार देती हैं। बंदूकों के बट और जूतों से उन्हें कुचला जाता है। क्योंकि ये जगह है पाकिस्तान का बलूचिस्तान।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जहां आजादी मांगने की सजा घर जलाकर, बस्ती फूंक कर, घरों को लूटकर और आजादी मांगने वालों को गोली मारकर दी गई है। बलूचिस्तान के सिबी जिले के गांव में अचानक पाकिस्तानी फौज घुसी। कई घरों को आग के हवाले करने से पहले 20 लोगों को सेना ने घर से उठाकर अपने कब्जे में ले लिया। इन बीस लोगों में 10 महिलाएं और बच्चे थे। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आजादी मांगने वाले आठ लोगों को मार डाला। अब तक आजादी की आवाज उठाने वाले 19 हजार लोग पाकिस्तानी फौज की गोलियों का शिकार बलूचिस्तान में हो चुके हैं।

पाकिस्तान में किस तरह से फौज बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वालों को कुचल रही है। ये चंद हकीकत हैं, क्योंकि बाकी का खौफनाक मंजर पाकिस्तान कभी सामने ही नहीं आने देता है। इस बात की जानकारी हाल में ही बलूचिस्तान की आजादी की आवाज उठाने वाली करीमा बालूच ने भी दी थी। यानी जिस तरह से पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करके वहां के नागरिकों को जीना मुहाल कर दिया है। उनकी जिंदगी नर्क से बदतर कर रखी है। वैसे ही बलूचिस्तान में भी लोगों के साथ जानवरों जैसा बुरा व्यवहार पाकिस्तान कर रहा है।

बलूचिस्तान के लोग किसी भी कीमत पर पाकिस्तान से अलग हो जाना चाहते हैं। 1944 में ही बलूचिस्तान को आजादी देने के लिए माहौल बन रहा था। पाकिस्तान ने हथियार के दम पर 1948 को बलुचिस्तान को अपने कब्जे में लिया था। तब से बलूच नागरिकों के दिल में जल रही आग ने अब ज्वालामुखी का रुप धारण कर लिया है। साल 2003 से शुरू हुए बलूच आंदोलन की शुरूआत गुरिल्ला हमलों से हुई थी। ये समूह बढ़ते-बढ़ते चरमपंथी और अलगाववादी बन गए। अभी बलूचिस्तान के ज्यादातर नेता विदेशों में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और पाकिस्तान से आज़ादी मांग रहे हैं, लेकिन 12 सालों से चल रहे इस संघर्ष को पाकिस्तान आर्मी की बदौलत दबाने में जुटा हुआ है।

पाकिस्तान से क्यों अलग होना चाहता है बलूचिस्तान: 1947 में बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में शामिल किया गया। 2004 से लेकर अब तक 14,362 लोग गायब हैं। 200 से अधिक महिलाएं भी लापता हैं। 2004 में सैन्य ऑपरेशन की शुरुआत परवेज मुशर्रफ ने की थी। 2006 में पाक आर्मी ने बलूच नेता बुगती की हत्या कर दी गई।

बुगती ने अपनी हत्या से पहले साल 2005 में पाकिस्तान सरकार के सामने 15 प्वाइंट का एजेंडा रखा था। उसके एजेंडे में बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा, बलूचों की सुरक्षा और इलाक़े में सैनिक अड्डा बनाने पर रोक जैसे मुद्दे थे, लेकिन पाक सरकार ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया। इसी के बाद पाकिस्तान सरकार के शोषण के ख़िलाफ बलूचिस्तान में फिर से आंदोलन शुरू हो गया।

1947 से ही बलूचिस्तान में विद्रोह की चिंगारी जल उठी थी। दरअसल बलूचिस्तान का पूरा इलाका करीब आधे पाकिस्तान के बराबर है। कहने को तो बलूचिस्तान का इलाका कुदरती खज़ाने से पटा पड़ा है, जिसकी मिलकियत के लिए ही लड़ाई चल रही है।