पाकिस्तानी सेना ने भाड़े पर करवाया हिंसक प्रदर्शन!

नई दिल्ली ( 28 नवंबर ): पाकिस्तान की सेना राजधानी इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे तहरीक-ए-लबैक पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ बल प्रयोग करने से इनकार कर दिया था। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में सेना का हाथ था?

पाकिस्तान में एक चौंका देने वाला वीडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को उन प्रदर्शनकारियों को पैसे देते देखा जा रहा है, जिन्होंने बीते हफ्ते कई शहरों को आदोंलन कर ठप कर दिया था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों को पैसे दे रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथी समूह के इन हिंसक प्रदर्शनकारियों ने कानून मंत्री जाहिद हामिद के इस्तीफे की मांग की थी और मांग पूरी होने पर ही प्रदर्शन बंद किया। 

पाकिस्तानी सरकार ने रविवार को प्रदर्शनकारियों के साथ एक समझौता किया जिसके तहत कानून मंत्री ने इस्तीफा दिया और उन प्रदर्शनकारियों को रिहा किया गया जिन्हें बीते हफ्ते गिरफ्तार किया गया था। ये प्रदर्शनकारी तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) नाम के छोटे से संगठन से जुड़े हुए थे और राजधानी इस्लामाबाद में करीब 3 हफ्ते से धरना प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी कानून मंत्री पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। 

पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को सड़कों से हटाने के दौरान कम से कम 6 लोगों की मौत भी हुई और सैकड़ों घायल भी हुए। सरकार के साथ समझौता होने के बाद कानून मंत्री ने इस्तीफा दिया और अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तान रेंजर्स के पंजाब डीजी मेजर जनरल अजहर नावीद को हर प्रदर्शनकारी को एक लिफाफा देते देखा जा रहा है, जिसमें 1 हजार रुपये हैं। 

जनरल नावीद यह लिफाफा देते हुए कह रहें हैं, 'कृपया इसे रख लो। यह हमारी तरफ से है। क्या हम आपके साथ नहीं हैं?' जनरल नावीद आगे कहते हैं, 'इंशाह अल्लाह, गिरफ्तार हुए सभी प्रदर्शनकारियों को छुड़वाएंगे।' 

वीडियो से पाकिस्तानी आर्मी और वहां के कट्टरपंथियों के बीच के गठजोड़ का साफ खुलासा हो रहा है। यही नहीं, वीडियो से पाकिस्तानी सेना के दबदबे और घरेलू राजनीति में उसकी भूमिका भी साफ दिख रही है। यह वीडियो ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अपने देश के कई हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों के लिए भारत पर फंडिंग करने का आरोप मढ़ता रहता है।