कार्यकाल नहीं बढ़वाना चाहते पाक सेना चीफ़, नवंबर में हट जाएंगे

इस्लामाबाद (25 जनवरी) :   पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल राहिल शरीफ़ ने कहा है कि वो नवंबर में तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अपने पद से हट जाएंगे। बता दें कि जनरल राहिल शरीफ़ को पाकिस्तान का सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है।

अभी तक पाकिस्तान में अधिकतर ऐसा ही देखा गया है कि सेनाध्यक्ष अपना कार्यकाल बढ़वाने पर ज़ोर देते हैं। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विंग की मानें तो जनरल शरीफ़ इस परिपाटी को तोड़ते हुए  नवंबर में सेनाध्यक्ष की कुर्सी से हट जाएंगे।   

जनरल शरीफ़ ने 2013 में सेनाध्यक्ष का पद संभाला था। उनके पदभार संभालने के साथ ही अफ़गान सीमा पर इस्लामी चरमपंथियों के खिलाफ़ बड़ा अभियान शुरू किया गया। उनके इस कदम को पाकिस्तानी जनता से बड़ा समर्थन मिला। आतंकी हिंसा से त्रस्त पाकिस्तानी जनता के लिए ये अभियान बड़ी राहत की तरह था।

वहीं जनरल शरीफ़ के आलोचको का कहना है कि उन्होंने चुनींदा आतंकी समूहो के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई की और कुछ आतंकी समूहों को हाथ नहीं लगाया। ऐसा माना जाता रहा है कि पाकिस्तानी सेना से जुड़े कुछ तत्व ऐसे इस्लामी सशस्त्र समूहों को समर्थन देते रहे हैं जो अफगानिस्तान और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

जनरल शरीफ़ ने पाकिस्तान में जब सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए तो प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का साथ दिया। साथ ही इसके एवज़ में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली। जनरल शरीफ़ ने कराची में हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए भी अभियान चलाया। इससे कराची में आए दिन होने वाले हत्या के अपराधों में कमी आई। लेकिन जनरल शरीफ़ को राजनेताओं की आलोचना का शिकार होना पड़ा कि उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया।   

जनरल शरीफ़ के कार्यकाल में ही सेना को सीक्रेट मिलिट्री कोर्ट्स में आतंकवाद के संदिग्ध लोगों पर मुकदमा चलाने के अधिकार मिले। कहा जाता है कि जनरल शरीफ़ ने ही अफगान तालिबान को अफगान सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस काम में बाद में रुकावट आ गई।