पाकिस्तान में हिंदूओं के साथ-साथ मंदिरों का भी हाल बेहाल, PAK सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

नई दिल्ली (24 नवंबर): पाकिस्तान में हिंदू और उनके तीर्थ स्थलों की हालात किसी से छुपी हुई नहीं है। आलम ये है कि वहां की अदालत तक में गाहे बगाहे इस मुद्दे की गुंज सुनाई देती रहती है। इसी कड़ी में कटासराज मंदिर के लगातार होती बदतर हालात पर वहां की सबसे बड़ी अदालत ने चिंता जताते हुए सरकार को फटकार लगाई है। पाकिस्तान में स्थित बेहद प्राचीन मंदिर कटासराज मंदिर में बने तालाब में पानी का स्तर दिनोंदिन घटता जा रहा है, जिसे लेकर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है और एक हफ्ते में तालाब के पानी का लेवल सही करने का आदेश सुना दिया है। चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार के अनुसार, हिंदुओं के हक को संरक्षित करने के लिए कोर्ट किसी भी हद तक जा सकती है।

कटासराज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर कटास की एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसके चलते इस मंदिर का नाम कटासराज मंदिर पड़ा है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसके कुंड का निर्माण भगवान शिव के आंसुओं से हुआ है। बताया जाता है कि जब भगवान शिव कि पत्नी देवी सती ने अपने पिता द्वारा आयोजित हवन की अगनी में कूदकर अपनी जान दे दी थी, तब भगवान शिव बहुत रोए थे। उस पहर भगवान शिव इतना रोए थे कि उनके आसुंओं से तलाब के दो कुंड भर गए थे, जिनमें से एक कुंड पाकिस्तान में है तो दूसरा राजस्थान के पुष्कर में। कटासराज में स्थित कुंड को भगवान शिव के आंसुओं से ही बना हुआ बताया जाता है।

इसी के साथ कटासराज मंदिर के साथ पांडवों की भी कई कथाएं जुड़ी हुई हैं। पांडवों की कथाओं के मुताबिक  कुंन्ती पुत्र पांडव कटास की पहाड़ियों में ही रहे थे और कटासराज मंदिर में स्थित कुंड में ही अपनी प्यास बुझाई थी। कटासराज का मंदिर वहीं जगह है जहां पर चार पांडव पानी पीने के बाद मुर्छित हो गए थे और पांचवे पांडव युधिष्ठिर के पानी पीने जाने पर यक्ष ने उनसे कुछ सवाल किए और सवाल के सही जवाब देने के बाद उनके भाई जोकि मुर्छित हो गए थे वो ठीक हो गए। 

लेकिन आज कटासराज मंदिर अपनी दुर्दशा खुद देख रहा है। हिंदुओं के सबसे प्राचीन माने जाने वाले मंदिरों में से एक कटासराज का जीर्णोद्धार किया जाना था, बावजूद इसके इस मंदिर के कुंड का पानी दिनोंदिन घट रहा है। आपको बात दें पाकिस्तान की कुल आबादी में  43 लाख हिंदू है, जिनकी दुर्दशा जग जाहिर है।