पाकिस्तान की 7 करोड़ पर भारी पड़ा भारत का एक रुपया

नई दिल्ली (18 मई): कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा के मुद्दे पर भारत को इंटरनेशनल कोर्ट बड़ी जीत मिली है। ICJ के फैसले से जहां भारत में खुशी का माहौल है वहीं पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। पाकिस्तान में गम पसरा है। इन सबके बीच पाकिस्तान अपनी नाकामी पर अजीबो-गरीब बहाने बना रहा है। अब तो आलम ये है कि पाकिस्तान में उनके वकीलों की फीस को लेकर भी सवाल उठाने लगे हैं।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता शयरी रहमान ने ICJ में पाकिस्तान का पक्ष रखने गए डेलीगेशन की फीस का बहाना बनाकर अपनी खटास निकाली है। PPP शयरी रहमान का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने वकीलों को करोड़ों रुपये दिए। रहमानी का कहना है कि हमारा केस मजबूत है और भारत ने कुछ क्लॉज़ का गलत इस्तेमाल किया है। साथ ही उन्होंने नवाज सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार क्या कर रही है। आलम ये है कि पाक टीवी चैनलों पर वकीलों पर खर्च को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सरकार ने वकीलों पर करीब 7 करोड़ रुपया खर्च किया है।

कुलभूषण जाधव पर अन्याय करने के लिए भले ही पाकिस्तान ने अपने वकीलों पर करोड़ों का खर्च किए हो लेकिन भारतीय वकील कुलभूषण जाधव को बचाने के लिए बिना फीस इंटरनेशनल कोर्ट पहुंच गए। इंटरनेशनल कोर्ट में भारत का पक्ष रखने वाले मशहूर वकील हरीश ने महज एक रुपये की फीस ली है। दरअसल फिल्मकार और समाजसेवी अशोक पंडित ने हरीश साल्वे को लेकर एक ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था कि भगवान का शुक्र है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में कांग्रेस के कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद नहीं बल्कि हरीश साल्वे पैरवी कर रहे थे। साल्वे के ट्वीट पर गोयल संजीव नाम के एक यूजर ने लिखा था कि कोई भी अच्छा वकील हरीश साल्वे से कहीं कम खर्च में ऐसे ही पैरवी करता। हमें फैसले का इंतजार करना चाहिए। इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद एक्शन में आ गईं। उन्होंने ट्वीट किया कि ये सही नहीं है। हरीश साल्वे ने हमसे ये केस लड़ने के लिए सिर्फ 1 रुपये फीस ली है।

फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने ये साफ कर दिया है कि इस केस में आखिरी आदेश आने तक कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक जारी रहेगी। इससे पहले कोर्ट ने 10 मई को जाधव की फांसी पर रोक लगाने का आदेश दिया था। जिसके बाद 15 मई को भारत और पाकिस्तान ने इंटरनेशनल कोर्ट में अपना-अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दोनों पक्ष सुनने के बाद आज इंटरनेशल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने अपना ये फैसला सुनाया।