'पाक की हिरासत में था ओसामा, अमेरिका के साथ समझौते में मारा गया'

नई दिल्ली (27 अप्रैल): "ओसामा बिन लादेन सालों तक पाकिस्तान की हिरासत में था। उसे इस्लामाबाद के वाशिंगटन के साथ किए गए एक समझौते के बाद मारा गया।" यह दावा है अमेरिका के एक शीर्ष पत्रकार का। जिन्होंने नए सबूतों का हवाला देते हुए ऐसा दावा किया है। गौरतलब है, ओसामा अलकायदा का संस्थापक था। इसी आतंकी समूह ने अमेरिका में 9/11 हमलों की जिम्मेदारी ली थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलित्ज़र अवार्ड से सम्मानित अमेरिकी खोजी पत्रकार सीमोर हेर्ष ने पाक की इस बात का खंडन किया कि वह अलकायदा नेता को मार गिराने वाले अभियान से अनजान था। उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि पाकिस्तान अमेरिकी नौसेना के सील कमांडो के वर्ष 2011 के अभियान से वाकिफ था। जिसमें ओसामा ऐबटाबाद शहर में पाकिस्तान के सैन्य प्रशिक्षण स्कूल के नजदीक स्थित अपने परिसर में मारा गया था। 

पाकिस्तानी अखबार, 'द डॉन' को दिए एक इंटरव्यू में सीमोर ने कहा कि पिछले साल से उन्होंने नया सबूत देखा। जिसने उनके इस विश्वास को मजबूत कर दिया कि ओसामा के मारे जाने पर अमेरिका का आधिकारिक बयान धोखे में डालने वाला है। उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि पाकिस्तान ने साल 2006 में ही लादेन को हिरासत में ले लिया था। उसे सउदी अरब के सहयोग से बंदी बनाकर रखा।

पत्रकार का कहना है कि अमेरिका और पाकिस्तान ने तब एक समझौता किया कि अमेरिका उसके परिसर पर धावा बोलेगा। लेकिन दिखाया ऐसा जाएगा कि पाकिस्तान इससे अवगत नहीं था। हेर्ष ने कहा, "पाकिस्तान भारत के चलते हमेशा सतर्क रहता है। उनके राडार सक्रिय रहते हैं। उनके एफ-16 लड़ाकू विमान हर समय तैयार रहते हैं।" उन्होंने कहा, "पाकिस्तानियों को खबर दिए बिना अमेरिकी हेलीकॉप्टरों के लिए ऐबटाबाद में घुसना आसान नहीं था।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब भी मानते हैं कि पाकिस्तान ने ओसामा को ठिकाने लगवाने में अमेरिका की मदद की? इसपर उन्होंने कहा, "पहले से ज्यादा।" रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी पत्रकार ने जब पिछले साल एक लेख में पहली बार यह दावा किया था। इसपर वाशिंगटन हिल उठा था। व्हाइट हाउस को इस खबर को झूठ बताकर खारिज करने को मजबूर होना पड़ा था। 

अमेरिका के बड़े मीडिया प्रतिष्ठानों ने भी उनके दावे को गलत कहकर खारिज किया था। लेकिन हेर्ष ने अपने दावे को इस सप्ताह प्रकाशित अपनी नई किताब 'द किलिंग ऑफ ओसामा बिन लादेन' में फिर दोहराया और कहा कि वह सही थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन पाकिस्तानी सेना और आईएसआई प्रमुखों ने अमेरिकियों के साथ समझौता किया था, जिससे अन्य पाकिस्तानी जनरल नाराज हो गए।