कश्मीर पर पाकिस्तान ने बदली अपनी रणनीति: गृह मंत्रालय

नई दिल्ली(13 अप्रैल): जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिये पाकिस्तान ने इस साल अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है। पड़ोसी देश ने घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए कट्टरपंथ की आड़ में स्थानीय नागरिकों को उकसाकर घाटी का माहौल खराब करने की कोशिश की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है।


साल 2016-17 के लिये बुधवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कश्मीर में फैले आतंकवाद का सीधा सम्बन्ध पाकिस्तान से हो रही घुसपैठ से है। यह घुसपैठ इंटरनैशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल, दोनों जगह से हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में पाकिस्तान ने कश्मीर में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। उसने राज्य में कुछ संगठनों द्वारा कट्टरता फैलाकर नागरिक प्रतिरोध के साथ-साथ आतंकवाद को भी फलने-फूलने में मदद की है।


गृह मंत्रालय ने कहा कि पिछले साल की तुलना में 2016 में घाटी में आतंकवादी घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। इस कारण बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए हैं। हालांकि, 2015 की तुलना में इस साल स्थानीय नागरिकों की मृत्यु के कम मामले दर्ज किये गये हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक 2015 की तुलना में 2016 में 54.81 प्रतिशत ज्यादा आतंकी वारदातें दर्ज की गई हैं। इस कारण इस साल हमारे सुरक्षाबलों के शहीद हुये जवानों की संख्या पिछली बार से 110.25 प्रतिशत ज्यादा है। यह काफी चिंताजनक है। वहीं, स्थानीय नागरिकों की मौत के मामले इस साल 11.76 प्रतिशत कम हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल 33.89 प्रतिशत ज्यादा आतंकी मौत के घाट उतारे गये हैं।


2016 में जम्मू-कश्मीर में हिंसा के 322 मामले दर्ज किये गये जिनमें सुरक्षाबलों के 82 जवान शहीद हुए और 150 आतंकवादी और 15 स्थानीय नागरिकों की मौत हुई। वहीं, 2015 में 208 हिंसक घटनाओं में 39 जवान शहीद हुए थे। इन घटनाओं में 108 आतंकियों की मौत हुई थी और 17 स्थानीय नागरिक मारे गये थे।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल पाकिस्तान से घुसपैठ के प्रयास के बहुत ज्यादा मामले दर्ज किये गये। इन घुसपैठों पर राज्य सरकार और सेना की जवाबी कार्रवाई में पिछले साल की तुलना में ज्यादा आतंकी मारे गये। 2016 में घुसपैठ के प्रयास और घुसपैठ के कुल अनुमानित मामले, दोनों ही पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं।


रिपोर्ट कहती है कि 2016 में घुसपैठ के 364 प्रयास दर्ज किये गये और जम्मू-कश्मीर में 112 आतंकियों ने घुसपैठ की। जबकि, 2015 में घुसपैठ के 121 मामले दर्ज किये गये थे और घुसपैठ करने वाले आतंकियों की संख्या 33 थी।