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मेरे परिवार ने कभी भी FIPB पर दबाव नहीं डाला: चिदंबरम

नई दिल्ली ( 30 मई): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने कहा कि उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी भी फारेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की।

एक बयान में उन्होंने अपने बेटे कार्ति चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि बोर्ड में निर्णय करने का अधिकार एक व्यक्ति नहीं कर सकता था, बल्कि छह सचिव इस पर फैसला करते थे। जिस अधिकारी ने भी उनके साथ काम किया, वह अच्छी तरह से जानता है कि उनके निर्णय को बदलने की हिम्मत किसी में नहीं थी।

उनका परिवार सरकारी कामकाज से बहुत दूर रहा करता था। चिदंबरम का कहना है कि सीबीआइ ने जो एफआइआर दर्ज की उसमें कार्ति के साथ आइएनएक्स मीडिया के संस्थापकों इंद्राणी व पीटर मुखर्जी पर भी निशाना साधा गया है जबकि कार्ति का इस कंपनी से कोई लेनादेना नहीं था।

जांच एजेंसी का कहना है कि कार्ति ने मीडिया कंपनी के जरिये पैसा हासिल किया। आरोप है कि कार्ति ने मारीशस से निवेश की गई रकम के एक मामले में जांच को प्रभावित करने की कोशिश की।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि हालांकि एफआइआर में उनका नाम शामिल नहीं है लेकिन निशाना उन पर ही साधा गया है। उनका कहना है कि उन्होंने उन मामलों में फैसला किया जिनकी बोर्ड ने संस्तुति की थी और आर्थिक मामलों के सचिव ने जो मामले उनके समक्ष पेश किए थे। उनका कहना है कि प्रमोशन बोर्ड में शामिल छह आइएएस अधिकारियों का रिकाॅर्ड बेहद पाक साफ रहा है।

बोर्ड के अध्यक्ष रहे डी सुब्बा राव रिजर्व बैंक के गवर्नर बने तो अशोक चावला कंपटीशन कमीशन आफ इंडिया के चेयरमैन बने थे। चिदंबरम ने कहा कि सबसे ज्यादा हैरत उन्हें दस लाख रुपये के चैक को लेकर हुई, जिसे एजेंसी रिश्वत की रकम बता रही है। उनका कहना है कि कार्ति से उन्होंने कहा कि वह जांच का सामना करे।


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