'इशरत' केस में सरकार पर चिदंबरम ने दागे यह सवाल

नई दिल्ली (25 अप्रैल): पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इशरत जहां केस में मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि ऐफिडेविट विवाद सिर्फ इसलिए पैदा किया गया है ताकि मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके। असली मुद्दा ये है कि क्या वहां फर्जी मुठभेड़ हुई थी और क्या कस्टडी में रखे गए 4 लोगों की फर्जी एनकाउंटर में हत्या की गई थी?

एक के बाद एक किए गए कई ट्वीट्स में चिदंबरम ने लिखा, ‘ऐफिडेविट पर आते हैं। हलफनामों पर गृहमंत्री हस्ताक्षर नहीं करता है। इन पर अंडर सेक्रेटरी हस्ताक्षर करता है। हालांकि मुझे ध्यान नहीं है कि क्या मैंने पहले एफिडेविट को देखा था। फिर भी मान लीजिए मैंने ऐसा किया। अब मैजिस्ट्रेट एसपी तमांग की रिपोर्ट पर गौर करते हैं। इस रिपोर्ट से खासा हंगामा खड़ा हुआ था खासतौर से गुजरात की सरकार ने भारत सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की थी। गुजरात सरकार ने कहा था कि या तो स्पष्टीकरण दिया जाए या पहले एफिडेविट में की गई गलत व्याख्या को हटाया जाए। यही वजह थी जो एक शॉर्ट एफिडेविट फाइल किया गया।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि इस केस में पहला एफिडेविट इंटेलिजेंस ब्यूरो के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर फाइल किया गया था, जिसमें कहा गया था कि 19 साल की इशरत लश्कर की ऐक्टिविस्ट थी लेकिन दूसरे एफिडेविट में इसे हटा दिया गया। दूसरे एफिडेविट के बारे में कहा जा रहा है कि से चिदंबरम ने खुद ड्राफ्ट किया। अधिकारी ने कहा, ‘इस एफिडेविट में कहा गया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो सके कि इशरत आतंकी थी।’

पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने दावा किया कि गृह मंत्री रहते हुए चिदंबरम ने फाइल अपने पास वापस बुला ली थी। चिदंबरम के बुलाने से एक महीना पहले असली एफिडेविट कोर्ट में पेश हो चुका था और इस एफिडेविट में इशरत और उसके मारे गए सहयोगियों को लश्कर आतंकी बताया गया था।