'देश के 30 फीसदी से ज्यादा वकीलों के पास फर्ज़ी डिग्रियां'

नई दिल्ली (27 फरवरी): देश में फर्जी वकीलों की छंटनी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने बुधवार को बताया कि इस समय चल रही सत्यापन (वैरिफिकेशन) की प्रक्रिया के नतीजे कई लोगों को हैरान करेंगे। शुरूआती अनुमान काफी बढ़कर है, जिसके मुताबिक 30 फीसदी से भी ज्यादा वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां हैं।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीआई चेयरमैन ने कहा, "हमने बीसीआई सर्टिफिकेट और प्रैक्टिस के स्थान के सत्यापन के नियम (2015) को लागू कर दिया है। इसके लिए हमने सभी वकीलों को नए फॉर्मेट के लिए फिर से पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। जिसके लिए उन्हें अपने सभी सर्टिफिकेट्स को अनिवार्य तौर पर जमा कराना होगा। जिसकी शुरुआत 10वीं बोर्ड कक्षा के नतीजों को शामिल किए जाने से होगी।"

इन प्रमाण पत्रों को इसके बाद संबंधित यूनिवर्सिटीज़ और बोर्ड से सत्यापित किया जाएगा। सत्यापन की पूरी प्रक्रिया 2016 तक पूरी की जाने की संभावना है। ऐसे सभी वकील जिन्होंने पिछले पांच सालों से प्रैक्टिस नहीं की है। वो वकील तो रहेंगे पर उन्हें प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं होगी।

बार काउंसिल ने राज्य सरकारों की मदद से विभिन्न राज्यों में लॉयर्स एकेडमी स्थापित करना शुरू कर दिया है। जहां पर कोर्ट प्रोसीजर्स और एथिक्स में वकीलों को तीन महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ऐसी पहली एकेडमी कोची में बनाई गई है। दूसरी एकेडमी झारखंड में बनाई जा रही है। इसके बाद जबलपुर में राष्ट्रीय स्तर की एकेडमी बनाई जाएगी। मिश्रा ने बताया कि एकेडमी की तरफ से वकीलों को प्रैक्टिस करने के लिए एक सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीआई चेयरमैन ने पहले कहा था कि करीब 20 फीसदी प्रैक्टिसिंग लॉयर्स के पास वैध डिग्री नहीं है। उन्होंने पिछले साल केंद्र सरकार से लॉयर्स एकेडमी शुरू करने के लिए फंडिंग के लिए संपर्क किया था। साथ ही फर्जी डिग्रीधारक वकीलों की छंटनी करने का भी वादा किया था।