दिल्ली में 1,200 से ज्यादा सरकारी मकानों पर अनाधिकृत कब्जा

नई दिल्ली (9 मार्च): दिल्ली में 1,200 से भी ज्यादा सरकारी मकान अनाधिकृत कब्जे में हैं। जो सरकारी मकानों की कुल संख्या का लगभग 2 फीसदी है। बुधवार को लोकसभा को इस बारे में सूचित किया गया।

अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 1,207 सरकारी मकान अनाधिकृत कब्जे में हैं। जिनमें कई प्रकार के मकान शामिल हैं। दिल्ली में जनरल पूल रेजीडेंशियल अकॉमोडेशन (जीपीआरए) के अंतर्गत आने वाले कुल मकानों का यह दो फीसदी है। शहरी विकास राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने एक लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी।

इन मकानों में से 299 सबसे निचले वर्ग टाइप-1 और टाइप-1एस में 299, टाइप-2 में 472, टाइप-3 में 202, टाइप-4 और टाइप -4एस में 189, टाइप-5 (ए, बी) में 20, हॉस्टल अकॉमॉडेशन में 5, टाइप-6 (ए, बी) में 16, टाइप-7 में 4 और टाइप-8 में एक मकान शामिल हैं। इन सभी मामलों में से 36 मामले अदालत में लंबित हैं। जबकि, 33 कश्मीरी प्रवासी और 27 पत्रकारों के पास हैं।

पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दिल्ली के सरकारी बंगलों के निकाले जाने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया है। जबकि, पूर्व वित्तमंत्री जसवंत सिंह इस वक्त टाइप-7 अकॉमॉडेशन में रह रहे हैं। वह इस समय काफी बीमार चल रहे हैं। सुप्रियो ने बताया, "पिछले तीन सालों के पब्लिक प्रिमाइसेस के प्रावधानों के तहत कुल 1,531 घरों को घायल कराया गया। 2013 में 246, 2014 में 539 और 2015 में 746 मकान खाली कराए गए।"