सर्जिकल स्ट्राइक 2011: खुलासे की टाइमिंग पर सवाल ?

नई दिल्ली (9 अक्टूबर): पांच साल पहले 2011 में भी भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। हालांकि तब ना तो इस पर सियासत हुई, ना ही पाकिस्तान में हड़कंम मचा, ना ही टीवी डिबेट में मुद्दा बना और ना तो यूएन तक बात गई। लेकिन पांच साल बाद जब फिर सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो बात यूएन तक पहुंची। पाकिस्तान में हड़कंम मचा, घंटों टीवी पर डिबेट हुई। सरकार पर सेना की बहादुरी का श्रेय लेने पर सवाल उठने लगे हैं और जमकर सियासत भी हो रही है। सबके मन में सवाल है कि आखिर इतन बड़ा ऑपरेशन हुआ तो सरकार ने इसका खुलासा क्यों नहीं किया था।

कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक का खुलासा इसलिए नहीं किया था, क्योंकि ये देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मसला था। उनका काम सेना की बहादुरी को सराहना था ना कि पब्लिसिटी करनी और राजनीति करनी थी। कांग्रेस जो भी तर्क दे, लेकिन अब इस खुलासे की टाइमिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं।

इस सर्जिकल स्ट्राइक में जिस तरह से रक्षा विशेषज्ञ सामने आए, उस तरह से पांच साल पहले हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर कोई बयान देता नज़र नहीं आया। हालांकि हर कोई जानता है कि दस दिन पहले हुई सर्जिकल स्ट्राइक कोई नई नहीं थी। ये कोई पहला मौका नहीं था, जब भारतीय जांबाज़ों ने पीओके में घुसकर पाक को सबक सिखाया हो। सेना को ये अधिकार हासिल है कि सिर के बदले सिर और हमले के बदले हमला कर सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान सरहद पर जब भी नापाक साजिश रचता है। हमारी सेना उसे माकूल जवाब देती है। अखबार के खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि उरी हमले के बाद हुई सर्जिल स्ट्राइक और साल 2011 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक यानि ऑपरेशन जिंजर में अंतर क्या है?

तब क्या होता था ? - तब बिना राजनीतिक मंज़ूरी के सर्जिकल स्ट्राइक होती थी। - तब ऑफ द रिकॉर्ड ऑपरेशन होता था। - तब सुरक्षा कारणों से एलान नहीं किया गया।

अब क्या होता है ? - अब पीएम के स्तर से राजनीतिक मंज़ूरी ज़रूरी है। - इस बार स्ट्राइक ऑन द रिकॉर्ड हुई। - इस बार सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई

शायद इसी वजह से इस बार हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत हुई। सरकार ने जहां एक तरफ सेना की शक्ति को सरकार की इच्छा शक्ति से जोड़कर देखा। वहीं विपक्ष ने सरकार पर सेना की बहादुरी के नाम पर सियासत का आरोप लगाया।