फिर बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, जानें वजह

                                                                                                         Image Source: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 नवंबर): पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार घटोत्तरी हो रही है। नवंबर महीने में तो 7 तारीख को छोड़कर अब तक हर दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटी हैं। लेकिन, संभव है कि दाम फिर से बढ़ने शुरू हो जाएं क्योंकि दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देश उत्पादन घटाना चाहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल उत्पादन में कटौती की जाए या नहीं, इन सवालों पर मंथन के लिए उनकी मीटिंग 6 दिसंबर को होने वाली है। उसी मीटिंग में आगे का अजेंडा तय होगा। फिलहाल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज दिल्ली में पेट्रोल का भाव 77.56 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल का भाव 72.31 रुपये प्रति लीटर है।

बता दें कि सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑइल में 70.69 डॉलर प्रति बैरल के भाव से ट्रेडिंग शुरू हुई। इससे पहले, शुक्रवार को यह 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे ट्रेड कर रहा था। ब्रेंट के प्रति बैरल 70-71 डॉलर के आसपास रहने से ग्राहकों में पेट्रोल-डीजल के दाम घटते रहने की उम्मीद जगी है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट ईरान पर अमेरिकी पाबंदी के बहुत प्रभावी नहीं होने की वजह से आ रही है। अमेरिका ने भारत, चीन, जापान समेत आठ देशों को ईरान से तेल आयात को लेकर पाबंदी में ढील दी है। साथ ही, अमेरिका, सऊदी अरब और रूस ने तेल उत्पादन बढ़ा दिया है। लेकिन, अगर कुछ तेल उत्पादक देश मनमर्जी पर उतर आए, तो पेट्रोल-डीजल पर मिल रही राहत कभी भी काफूर हो सकती है।

गौरतलब है कि जितना सस्ता पेट्रोल-डीजल आपको मिल रहा है, तेल उत्पादक देशों की आमदनी उसी अनुपात में घट रही है। यही वजह है कि सऊदी अरब अब तेल उत्पादन घटाने की सोच रहा है। हालांकि, उसने पहले उत्पादन बढ़ाने का भरोसा दिया था। सऊदी अरब, इराक और ईरान जैसे तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक एवं रूस जैसे अन्य तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन घटाने पर चर्चा को लेकर अबू धाबी में मीटिंग की।

आपको बता दें कि तेल उत्पादक देशों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर तेल की कीमतें घटती रहीं तो 2014-16 वाली स्थिती उत्पन्न हो जाएगी जब अमेरिकी शेल ऑइल के उत्पादन की वजह से कीमतें 70% गिर गई थीं। इस गिरावट का तेल उत्पादक देशों पर गहरा असर पड़ा था। तब सऊदी अरब का वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 16% हो गया था। इस बार सऊदी अरब ने वित्तीय घाटे को जीडीपी के 7.3 प्रतिशत तक रोकने का लक्ष्य रखा है।