जैशा के साथ जो हुआ वह सबसे बड़ा अपराध, क्या आरोपियों पर होगी कार्रवाई?

नई दिल्ली (22 अगस्त): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से रियो ओलंपिक गए खिलाड़‍ियों के प्रोत्साहन बढ़ाने की बात कही हो, लेकिन मैराथन रनर ओपी जैशा ने जिस तरह के आरोप भारतीय ओलंपिक समिति पर लगाए हैं वह किसी अपराध से कम नहीं हैं।

ओपी जैशा 42 किमी बिना पानी पिए दौड़ी और भारतीय स्टाफ और कोच की इस गलती के चलते मैं लगभग मर ही गयी थी। मैं गर्मी और थकान की वजह से बेहोश हो गयी थीं। आईएएएफ के नियमों के अनुसार यह खिलाड़ी के फेडरेशन और साथ आये स्टाफ के लोगों की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने खिलाड़ी को पानी आदि पकड़ाने के लिए तय स्थान पर खड़े रहें। लेकिन भारत की तरफ से गए फेडरेशन के खिलाड़ी सिर्फ रियो में मस्ती करते दिखाई दिए। न्यूज 24 का सवाल है कि ऐसे में अगर उन्हें कुछ हो जाता तो क्या भारतीय ओलंपिक समिति पर मर्डर का केस दर्ज किया जाता।

भले ही मेडल जीतने पर हमारे देश में खिला‍ड़‍ियों पर पैसा पानी की तरह बहाया जाता हो, परन्तु ओपी जैशा ने भारत आने के बाद मीडिया को जो बताया उससे साफ पता चलता है कि सरकार खिलाड़‍ियों के लिए कितना कुछ कर रही है।

जैशा ने लगाए यह आरोप...

- उन्हें बयालीस किलोमीटर एक सौ पनचानबे मीटर की मैराथन रेस में बगैर पानी पिये दौड़ाया जाता है।

- दूसरे देशों के खिलाड़ियों को हर ढाई किलोमीटर पर ग्लूकोज और शहद जैसी चीजें दी जा रही थीं।

- भारत की एथलीट को सादा पानी भी देने वाला कोई नहीं था।

- हर ढाई किलोमीटर पर भारत का डेस्क लगा तो था, लेकिन वहां रिफ्रेशमेंट देने के लिए भी कोई खड़ा नहीं था।

- आठ किलोमीटर के अंतराल पर उन्हें ओलंपिक की ओर से ही पानी मिल सका।

- हालात यह हो गए कि रेस पूरी करते-करते रनर बेहोश हो गई और दो-तीन घंटे बाद ही सात बोतल ग्लूकोज की ड्रिप लगाने के बाद उन्हें होश आ सका।

खेल मंत्री विजय गोयल भी गए थे रियो...

- रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने गए भारतीय दल के साथ खेल मंत्री विजय गोयल भी पहुंचे थे।

- लेकिन ज्यादातर समय वह सेल्फी लेने में व्यस्त दिखे।

- बीजिंग में दो घंटे चौंतीस मिनट और तेतालीस सेकेंड में मैराथन पूरी करने वाली जैशा को रियो ओलंपिक में दो घंटे सैंतालीस मिनट और उन्नीस सेकेंड लग गए।