Rio Olympics: मैराथन से गायब था भारतीय स्‍टाफ, 42 KM प्‍यासी दौड़ी Athlete!

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (22 अगस्त): ब्राजील के रियो शहर में 17 दिन बाद 31वें ओलंपिक खेलों का रविवार को रंगारंग समापन हो गया। इन खेलों में भारत को केवल दो पदक मिले, एक रजत और कांस्‍य मिला। पिछले दो ओलंपिक से तुलना में यह भारत का सबसे खराब प्रदर्शन था। 2008 बीजिंग ओलंपिक में भारत को जहां 1 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक मिले थे। तो वहीं 2012 लंदन ओलंपिक में भारत ने 2 रजत और 4 कांस्य समेत 6 मेडल जीते थे। इस बार रियो में भारत ने 119 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जिसमें से 117 खिलाड़ी खाली हाथ लौटे हैं। 

रियो ओलंपिक में सिर्फ खराब प्रदर्शन ही विवाद का विषय नहीं रहा खराब प्रबंधन से भी खिलाड़ियों को दो चार होना पड़ा। रियो ओलंपिक में घटी इस घटना ने ना केवल भारत को शर्मनाक किया बल्कि खिलाड़ियों के हौलसे को भी तोड़ने का काम किया। महिला मैराथन के दौरान भारतीय खिला‍ड़ी को पानी तक नहीं मिला। जी हां, सुन कर थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि इतने बड़े आयोजन में पानी की कम कैसे हो गई? लेकिन यह सच हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, महिला मैराथन के दौरान भारतीय खिला‍ड़ी पानी को तरस गई क्योंकि रेस के दौरान भारतीय दल की डेस्‍क पर कोई भी व्‍यक्ति मौजूद नहीं था। 

महिला मैराथन में भारतीय एथलीट ओपी जैशा और टुंगर कविता भाग ले रही थी। इस प्रतियोगिता में जैशा 89 और कविता 120वें स्‍थान पर रहीं। लेकिन पूरी मैराथन के दौरान दोनों एथलीट को पीने को पानी नहीं मिल पाया। क्योंकि रेस के दौरान भारतीय दल की डेस्‍क पर कोई भी व्‍यक्ति मौजूद नहीं था। मैराथन के दौरान प्रत्‍येक 2.5 किमी पर बाकी सभी देशों के अधिकारी पानी और अन्‍य रिफ्रेशमेंट के साथ मौजूद थे। लेकिन भारत से कोई नहीं था। मैराथन पूरी होने के बाद जैशा पानी की कमी के चलते गिर गई थी। ओपी जैशा के अनुसार, हमारी डेस्‍क खाली थी। वहां पर देश का नाम और झंडा लगा हुआ था। लेकिन पानी देने वाला कोई नहीं था। मुझे नहीं पता मैंने बिना पानी के दौड़ कैसे पूरी की।

रियो ओलंपिक के आयोजक केवल 8 किलोमीटर की दूरी पर ही पानी और स्‍पंज उपलब्‍ध कराते हैं। यह पानी केवल 500 मीटर ही चलता है। और चिलचिलाती धूप में 10 किमी भी दौड़ना असंभव हो जाता है। जबकि यह मैराथन 42.195 किमी का था। जैशा के अनुसार अन्‍य देशों के खिलाडि़यों को ग्‍लूकोज और शहद जैसी चीजें मिल रही थी। वहीं उन्‍हें व कविता को पानी तक नहीं मिला। रेस पूरी होने के बाद वह गिर गर्इ। 2-3 घंटे तक होश नहीं था। साथी खिलाड़ियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जहां उन्‍हें 7 बोतल ग्‍लूकोज की चढ़ाई गई। 

अंतरराष्‍ट्रीय एथलेटिक्‍स फैडरेशन के नियमों के अनुसार मैराथन के दौरान कोई भी देश आधिकारिक स्‍टेशनों के अलावा चार जगहों पर चार पानी और रिफ्रेशमेंट के लिए व्यक्ति नियुक्‍त कर सकता है। जो अपने देश के खिलाड़ी को पानी उप्लब्ध कराता है। मैराथन में दौड़ने वाला किसी दूसरे देश का सामान नहीं ले सकता है। जैशा के भारत लौटने के बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया(साई)के डॉक्टरों ने चैक किया कि उन्हें बुखार है। जैशा का मुताबिक वो अभी काफी कमजोर फील कर रही हैं और उन्हें ठीक होने में 2-3 महीने लग सकते हैं।

कैसे तैयार होते हैं मैराथन के एथलीट 

तीन तरह की ट्रेनिंग जरूरी है... - बड़ी दौड़ में हिस्सा लेने वालों को सबसे पहले कार्डियोवास्कुलर ट्रेनिंग दी जाती है इससे हार्ट मजबूत होता है और दौड़ने के समय सास नहीं फूलती।  - इसके बाद एथलीट अपनी इंडीविजुअल स्ट्रेंथ बढ़ता है, अपर ऑडी मसल्स, थाई मसल्स, लेग मसल्स, जॉइंट की स्ट्रेंथिंग, नी की स्ट्रेंथिंग बढ़ाता है। - इसके बाद फ्लेक्सिब्लिटी बढ़ाई जाती है कि तालमेल बन सके और मसल्स में खिंचाव ना आए।

शरीर में फ्ल्यूड की कमी नहीं होने देते... - दौड़ की शुरुआत धीरे-धीरे की जाती है, बॉडी में फ्ल्यूड का बैलेंस बनाए रखा जाता है। - एक हफ्ते पहले से इलेक्ट्रॉल, जूस और पानी भरपूर लिया जाता है ताकि कभी भी बॉडी में फ्ल्यूड की मात्रा कम न हो।  - शरीर में पानी का लेवल बनाए रखने के लिए एथलीट दिनभर पानी पीते रहते हैं।

कार्बोहाइड्रेट बढ़ाते और प्रोटीन बंद कर देते हैं... - मैराथन में हिस्सा ले रहे हैं एथलीट रेस के दो से तीन दिन पहले से डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ा देते हैं और प्रोटीन बंद कर देते हैं।  - इससे बॉडी को पूरी एनर्जी मिलती है और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो मसल्स में दर्द होने का खतरा रहता है।

दौड़ने के बाद इन बातों का ख्याल रखते हैं... - दौड़ने के एक घटे बाद ही एथलीट कुछ खाते हैं। - दौड़ने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है।  - एनर्जी के लिए नींबू पानी, नारियल पानी या सादा पानी लिया जाता है।  - दौड़ने के एक घंटे बाद केले, अंडे, सेब या ऑमलेट लिया जाता है। - खाने में नमक भी ज्यादा शामिल किया जाता है  क्योंकि पसीने से शरीर में नमक की कमी हो जाती है। - एक मील दौड़ने में औसतन 100 कैलोरी खत्म होती है।