प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सिर्फ कैश और बैंक FD की कर सकते हैं घोषणा

नई दिल्ली ( 19 जनवरी ): आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटबंदी के बाद जो इनकम डिसक्लोजर स्कीम ( प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना) के नाम से लाई गई है, उसके तहत सिर्फ उस कैश और बैंक डिपॉजिट की जानकारी दी जा सकती है, जिस पर पहले टैक्स न चुकाया गया हो। नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा अघोषित धनराशि पर टैक्स वसूली के लिए शुरू की गई स्कीम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के बारे में सरकार ने नियम-कायदे तय कर दिये हैं। इनके अनुसार योजना में सिर्फ घरेलू नकद राशि की ही घोषणा हो सकती है। ज्वैलरी, शेयर, अचल संपत्ति और विदेशी बैंकों में खातों में जमा राशि इस योजना के दायरे में नहीं आएगी।

आयकर विभाग ने बुधवार को बताया कि जो कैश जब्त किया गया है, उसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत टैक्स चुकाने के लिए किया जा सकता है। इसमें बताया गया है कि अगर किसी शख्स का इनकम टैक्स सर्च या सर्वे हुआ है, वह भी स्कीम के तहत कैश और बैंक एफडी के तौर पर पड़े काले धन की जानकारी दे सकता है।

नोटबंदी शुरू होने के कुछ हफ्ते बाद यह स्कीम लाई गई थी। इसमें काले धन पर 50 पर्सेंट टैक्स चुकाना होगा और 25 पर्सेंट रकम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण डिपॉजिट स्कीम में जमा होगी, जिस पर चार साल तक ब्याज नहीं मिलेगा। यह स्कीम 31 मार्च, 2017 तक खुली है। इस तारीख से पहले वित्त वर्ष 2017 में जमा कितनी भी रकम की घोषणा इस स्कीम में की जा सकती है।

आयकर विभाग के सर्कुलर में बताया गया है, 'स्कीम में सिर्फ कैश या बैंक एफडी की जानकारी दी जा सकती है। इसके तहत आप ज्वैलरी, स्टॉक्स या अचल संपत्ति डिक्लेयर नहीं कर सकते।' इससे पहले मोदी सरकार ने इनकम डिसक्लोजर स्कीम (आईडीएस) स्कीम का ऐलान किया था, जो पिछले साल 30 सितंबर को खत्म हो गया। वहीं, सरकार ने फॉरेन ब्लैक मनी स्कीम का भी ऐलान किया था। इसमें विदेशों में रखे काले धन पर टैक्स चुकाकर उसे वाइट मनी में बदलने की छूट दी गई थी।

आयकर विभाग के सर्कुलर में बताया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का फायदा विदेशी बैंक खाते में पड़ी रकम पर नहीं मिलेगा। चुकाए गए एडवांस टैक्स, टीडीएस या टीसीएस को भी स्कीम में शामिल नहीं किया जाएगा। पिछली इनकम डिसक्लोजर स्कीम में इनकी भी इजाजत दी गई थी। अगर किसी शख्स को इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 142(1)/ 143(2)/ 148/ 153A/ 153C के तहत नोटिस मिला है, तो भी वह मौजूदा स्कीम का फायदा उठा सकता है। इसमें बताया गया है कि कोई भी बैंक डिपॉजिट या ओवरड्राफ्ट के बदले जमा कराई गई रकम, कैश क्रेडिट एकाउंट या लोन एकाउंट को मौजूदा स्कीम में डिक्लेयर किया जा सकता है।

सर्कुलर में बताया गया है कि अगर 1 अप्रैल 2016 से 15 दिसंबर 2016 के बीच किसी डिपॉजिट को डिक्लेयर नहीं किया गया है तो उस मामले में आयकर कानून की धारा 115 बीबीई के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बताया है कि सेविंग्स, करेंट, फिक्स्ड, रेकरिंग या बैंक और पोस्ट ऑफिसों में किए गए किसी भी डिपॉजिट को स्कीम के तहत डिक्लेयर किया जा सकता है।