ऑनलाइन ट्रॉलिंग की एक सच्ची घटना, देखिए "जाल" में रात 9:55 पर

नई दिल्ली (11 मई): वैसे तो सर्वोच्च न्यायलय ने 2015 में आईटीएक्ट (2008) के सेक्शन 66A को ख़ारिज कर दिया, मगर आज भी कुछ कानून ऐसे हैं जो एक आम आदमी को इंटरनेट पर होने वाले उत्पीड़न से बचाव करते हैं। सभी कानून 'इंटरनेट' का ज़िक्र तो नहीं करते, लेकिन कहीं ना कही वो मामले ऑनलाइन सोशल मीडिया या इमेल्स के ज़रिये हुए उत्पीड़न, स्टाकिंग या मानहानि के तहत गिने जा सकते हैं।IPC के वो प्रावधान जो यौन शोषण से सम्बंधित हैं, उन्हें 2013 में संशोधित किया गया  और अनुच्छेद 354 में बदलाव लाया गया (महिला के सम्मान के विरुद्ध किसी भी ज़बरदस्ती या हमला जैसे मामलों पर आधारित हैं)इससे सम्बंधित मामले इस प्रकार हैं:-यौनउत्पीड़न:- यदि कोई व्यक्ति इंटरनेट पर किसी से सम्बंधित भद्दे या गंदे शब्द डालता है, तो IPC के 354 अनुच्छेद के तहत उसे 1 साल की सजा हो सकती है। इसके अंदर पोर्नोग्राफी के वो मामले भी आते हैं, जहां व्यक्ति के इच्छा के विरूद्ध वो वीडियो या पिक्चर पोस्ट की गयी हो या जबरन यौन सम्बन्धी कार्य करने का ज़ोर दिया गया हो।

साथ ही सेक्शन 509 के तहत ऐसे किसी भी कार्य के लिए सजा मिल सकती है जहां व्यंग्य, छेड़छाड़, गलत इरादे से ऐसा कोई भी ईमेल, मैसेज या संवाद स्थापित किया गया हो, जो यौन सम्बन्धी बातों से जुडी हो और जहां अगले व्यक्ति की मंज़ूरी नहीं। हाल के संशोधन के अनुसार इसकी सजा 3 साल हो गयी है।गलत इरादे से ताकझांक:- IPC और आईटी एक्ट दोनों की नज़र में ये एकदंडनीय अपराध है। अगर कोई भी 'व्यक्तिगतकार्य', तस्वीर या वीडियो के माध्यम से, बिना स्त्री की इजाज़त के इंटरनेट पर ले ली जाती है और उसका किसी भी तरह से प्रयोग किया जाता है तो ये दंडनीय अपराध है और इसके लिए 1-3 साल की सजा हो सकती है।

'व्यक्तिगतकार्य' के अंदर वो सभी कार्य आते हैं जो सामान्यरूप से भी व्यक्तिगत हो सकते हैं। इसके अंदर तीन बातें आती हैं, जब महिला यौन सम्बन्ध में लिप्त हो, टॉयलेट में हो, कपडे़ बदल रही हो या महिला के व्यक्तिगत अंग नज़र आ रहे हों। इन सूरतों में व्यक्तिगतकार्य की श्रेणी होती है। ऐसे तस्वीरें लेना, बेचना या ऑनलाइन इस्तेमाल करना तांक-झांक या मानहानि के तहत आते हैं, जिसमें आईटी एक्ट के द्वारा अपराधी को 3 साल की सजा और 2 लाख जुर्माना देना है।यौन सम्बन्धी स्पष्ट तस्वीर:- आईटी एक्ट और भी स्पष्ट रूप से यौन सम्बन्धी तस्वीरों के मेल में सजा का ज़िक्र करती है जहां ऐसी तस्वीरों का ऑनलाइन संचारण किया जाता है। पहले जुर्म में 3 साल की सजा मिल सकती है, 10 लाख जुर्माने के साथ और उसके बाद दुबारा वैसे ही जुर्म में 7 साल की सजा मिल सकती है, 10 लाख जुर्माने के साथ।ऑनलाइन स्टाकिंग:- ये वो जुर्म है जिसमें अपराधी बिना इजाज़त किसी भी इंसान का पीछा करता है। ऑनलाइन उसकी हर जानकारी और कार्य पर कड़ी नज़र रखता है और उन सारी जानकारी की मदद से उस व्यक्ति को परेशान करता है। IPC के अनुच्छेद 354 के अनुसार, स्टाल्कर को 3 साल की सजा मिल सकती है। अगर दुबारा यही जुर्म किया गया तो 5 साल की सजा और फाइन की सजा मिलती है।

IPC के अनुच्छेद 292 के अनुसार कोई भी किताब, मैगज़ीन, आर्टिकल, पिक्चर, तस्वीर, ऑनलाइन मटेरियल, फिल्म या वीडियो "कामुक" या "विरल" प्रवृत्ति होगा और उससे "Obscene " कहा जायेगा जो आईटी एक्ट के अनुच्छेद 67B के तहत आता है और ऑनलाइन ऐसे मटेरियल को भी कहा जायेगा जो "ऑनलाइनफॉर्म" हैं। IPC के अनुच्छेद 499 के तहत ऐसी कोई भी टिपण्णी, संवाद, भाषण, आर्टिकल, पिक्चर या वीडियो इसके लिए अपराधी को 2 वर्षों की सजा मिल सकती है जो जनता के सामने व्यक्ति को बदनाम करने के लिए प्रसारित की गई हो, वो मानहानि के अंदर आता है। आपराधिक अभित्रास या धमकी:- यदि किसी महिला को नुकसान पहुंचाने के लिए धमकी या चेतावनी दी जाती है, तो उसे IPC के अनुच्छेद 503 के तहत 2 साल की सजा सुनाई जा सकती है। यदि गुमनाम तरीके से किया जाता है तो भी 2 साल की सजा हो सकती है।

इस शुक्रवार को ऑनलाइन ट्रॉलिंग की एक सच्ची घटना पर देखिए "जाल" रात 9:55 पर, News24 चैनल पर।