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पिछले साल के मुकाबले प्याज का दाम 80% कम, किसानों को भारी नुकसान

 

 

नई दिल्ली ( 19 अक्टूबर) : अक्टूबर में प्याज की कीमत पिछले साल के मुकाबले 80 फीसदी और अक्टूबर 2014 से तकरीबन 66 फीसदी कम है। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों की तरफ से खरीदी गई 50 फीसदी प्याज पहले ही वेयरहाउसों में सड़ रही है। लासलगांव एपीएमसी में प्याज की न्यूनतम कीमत पिछले दो महीने से 2 रुपये प्रति किलो है, जबकि कर्नाटक से खरीफ सीजन के प्याज की आवक भी शुरू हो गई है। चूंकि महाराष्ट्र की खरीफ फसल भी अगले महीने से आने की उम्मीद है, लिहाजा स्टोरेज में रखे गए प्याज की कीमतों में और गिरावट हो सकती है। 

अक्टूबर 2015 में लासलगांव एपीएमसी में प्याज का औसत होलसेल भाव 32.48 रुपये प्रति किलो था, जो अक्टूबर 2016 में घटकर 5.85 रुपये प्रति किलो हो गया। लासलगांव एपीएमसी में प्याज की सबसे सस्ती कीमत 17 अक्टूबर को 1 रुपये प्रति किलो रही। बेंगलुरु एपीएमसी में खरीफ प्याज की कीमत 5 से 11 रुपये प्रति कोल के बीच चल रही है।

एसएफएसी केंद्र सरकार की तरफ से तैयार किए गए प्राइस स्टैबलाइजेशन फंड (पीएसएफ) का मैनेजर है। हालांकि, एजेंसी के टॉप अधिकारियों ने इसके प्रोक्योरमेंट ऑपरेशंस के बारे में जानकारी नहीं दी। खबरों के मुताबिक नेफेड और एसएफएसी की तरफ से खरीदे गए 50 फीसदी से भी ज्यादा प्याज के सड़ जाने का अनुमान है। बाकी प्याज औसतन खरीद मूल्य के महज 50 फीसदी पर बेचे गए।

नेफेड के डायरेक्टर नानासाहेब पाटिल ने बताया कि प्याज खरीदकर उसे रखने में नेफेड को बड़ा नुकसान हुआ। देश के किसानों को भी कुछ इसी तरह का नुकसान है, जिन्होंने 45 लाख टन प्याज का उत्पादन किया। किसानों के इस नुकसान के लिए कोई भी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है। एसएफएसी ने 12,567 टन प्याज की खरीदारी की थी और 15 सितंबर के मुताबिक, एजेंसी सिर्फ 5,518.55 टन प्याज बेच सकी।

हालांकि, अधिकारियों ने सड़ चुके प्याज और एजेंसी को हुए नुकसान के बारे में जानकारी नहीं दी। मध्य प्रदेश सरकार ने 62 करोड़ का 10.42 लाख टन प्याज खरीदा था। इनमें से 70 फीसदी प्याज वेयरहाउसों में ही सड़ गए। नेशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड0 ने 5,000 टन प्याज खरीदा था।


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