एक बच्चा और तीन पिता!

नई दिल्ली (21 जुलाई): एक बच्चा और उसके तीन तीन पिता! सुनकर भले अजीब लगे, लेकिन मध्य प्रदेश के डिंडौरी में एक मासूम की जिंदगी का ये कढ़वा सच है। जिसके जन्मप्रमाण पत्र ने उसकी जिंदगी पर ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

कल तक जो उसके दोस्त थे वो उसका मजाक उड़ा रहे हैं, वो पढ़ना चाहता था, लेकिन पिता के तीन नामों की वजह उसे अगली क्लास में दाखिला भी नहीं मिला। ग्राम पंचायत की एक लापरवाही या अनदेखी उसकी जिंदगी के लिए सजा बन चुकी है। इस बच्चे में पढ़ाई का जज्बा देखिये  यह बच्चा अपने गाँव के बच्चों को भी पढ़ाता है। 

डिंडौरी के निगबानी गांव में रहने वाला ये बच्चा पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। इसकी जिंदगी में जो गुजरी है जिसके चलते इससे सीधे रूबरू करवा पाना मुमकिन नहीं। पर इसकी कहानी न बताई जाए वो भी इस मासूम के साथ ना इंसाफी होगी। क्योंकि ये निर्दोष उस जुर्म की सजा भुगत रहा है, जो किया किसी और ने है। लेकिन हर निगाह इसे ही कटघरे में खड़ा करती है और अब तो ये बेगुनाह पढ़ाई से भी वंचित कर दिया गया है और उसकी वजह बना है इसका जन्म प्रमाण पत्र।

इस मासूम के जन्म प्रमाण पत्र पर तीन तीन पिताओं के नाम लिखे हैं। दरअसल कुछ साल पहले उसकी मां के साथ गैंगरेप हुआ। उसे इंसाफ तो नहीं मिला, उल्टे उस पीड़िता के ये बेटा सजा भुगतने पर मजबूर हो गया। जिसके जन्मप्रमाण पत्र में ग्रामपंचायत ने रेप के तीनों आरोपियों का ही नाम लिख दिया। लापरवाही की इंतहा ये है कि पांचवीं  तक इसी जन्मप्रमाण पत्र पर बच्चे को दाखिला भी मिलता रहा। मामले का खुलासा हुआ जब ये बच्चा छठवीं  कक्षा में प्रवेश लेने पहुंचा।

जन्म प्रमाण पत्र में एक बच्चे के तीन तीन बाप का नाम लिखकर ग्राम पंचायत ने तो अपने काम से पल्ला झाड़ लिया और अब जिम्मेदार अधिकारी जन्मप्रमाण पत्र में संशोधन कर उसे न्याय दिलाने की जगह सिर्फ स्कूल में दोबारा दाखिला दिलाने का दावा कर रहे हैं।

स्कूल में दाखिला मिलने के बाद बच्चे की ख्वाहिश तो पूरी हो जाएगी, लेकिन बाप के नाम पर लिखे तीन तीन नाम हमेशा के लिए उसे सवालों में घेरते रहेंगे। ये मासूम इन सवालों से कैसे बच सकता है। इसका जवाब फिलहाल न उस बेबस मां के पास है और न उस लापरवाह सिस्टम के पास, जिसने बच्चे के भविष्य को बेरहम मजाक बना दिया है।