नेताजी की मौत से जुड़ी मिस्ट्री पर बड़ा खुलासा

नई दिल्‍ली (10 जनवरी): 70 साल से रहस्य की परतों में लिपटी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत पर कई दावे हो चुके हैं। बोस के आखिरी दिनों का ब्यौरा जारी करने के लिए शुरु की गई एक ब्रिटिश वेबसाइट ने नया दावा किया है। इस वेबसाइट के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़ी मिस्ट्री का खुलासा करने के लिए वो दस्तावेज मिल गए हैं जिसमें हादसे के चश्मदीदों का पूरा ब्योरा है।

वेबसाइट का कहना है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुई उस विमान दुर्घटना के दिन के बारे में चश्मदीदों से मिली कई जानकारी है, जिससे साबित होता कि इसी हादसे में सुभाष चंद्र बोस की मौत हुई थी। इस नए दस्तावेजों में उन कई लोगों का हवाला दिया गया है जो दुर्घटना से जुड़े मामले में शामिल थे। इसमें दो ब्रिटिश खुफिया रिपोर्टें भी शामिल हैं जो तथ्यों को स्थापित करने के लिए दुर्घटना स्थल का दौरा करने के बाद तैयार की गई।

वेबसाइट का दावा है कि नेताजी के मौत से जुड़े ये दस्तावेज हादसे के चश्मदीदों के जरिए साझा की गई जानकारियों की बुनियाद पर तैयार की गई हैं। वेबसाइट में कहा गया है कि 70 बरसों से ये संदेह रहा है कि क्या ऐसी कोई दुर्घटना हुई थी। चार अलग-अलग रिपोर्टों में एक दूसरे के उलट साक्ष्य हैं। 18 अगस्त 1945 की सुबह जापानी वायुसेना के एक बंबर विमान ने वियतनाम के तूरान से बोस और 12-13 अन्य यात्रियों उड़ान भरी। विमान का मार्ग हेतो-ताइपे-डेरेन-टोक्यों था। मौसम ठीक था और इंजन सुचारू रूप से काम कर रहा था। बोस के एडीसी कर्नल हबीब उर रहमान के मुताबिक कुछ ही देर बाद एक जबरदस्त विस्फोट हुआ। उड़ान भरने के ठीक बाद विमान अपनी बाईं ओर झुक गया और हवाईपट्टी से करीब 100 मीटर की दूरी पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ और तुरंत ही इसके अगले हिस्से में आग लग गई।

वेबसाइट के मुताबिक जब विमान में आग लगी तो इस तस्वीर को देखने वाले एयरपोर्ट पर कई लोग मौजूद थे। विमान सिर्फ 30-40 फीट ऊपर थी, लेकिन एक चश्मदीद के बयान के हवाले से जो दस्तावेज वेबसाइट पेश कर रही है वो ये इशारा कर रहे है कि नेताजी की मौत विमान में आग लगने की वजह से हुई। वेबसाइट के मुताबिक विमान के अगले हिस्से में आग लग गई थी। कर्नल रहमान ने बताया कि नेताजी आगे से ही बाहर निकले, वह आग से होकर दौड़ें। उनके कपड़ों में आग पकड़ जुकी थी, मैंने उन्हें जमीन पर लिटाया और पाया कि उनके सिर पर कटने का एक गहरा निशान है। उनका चेहरा झुलस गया था और उनके बाल भी आग से झुलस गए थे। नेताजी को गंभीर हालत में नानमोन मिलिट्री अस्पताल में ले जाया गय़ा।

हालांकि रहमान, नोनोगाकी, कोनो, तकाहाशी और नाकामुरा ये सभी लोग हादसे के वक्त नेताजी के साथ थे विमान पर या विमान के आसपास थे, फिर भी बयान अलग-अलग हैं और इन लोगों के बयान दुर्घटना के 11 साल बाद साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए। इन तमाम लोगों के बयान में एक बात जो कॉमन है वो है ये है कि नेताजी झुलस गए थे। मौत की पुष्टि किसी ने नहीं की है। मौत की इस थ्यूरी पर पहले भी कई बार मुहर लगाने की कोशिश हुई है लेकिन ठोस सबूत के अभाव में ये दावा कहानियों से आगे नहीं निकल पाया।