उमर अब्दुल्ला का बयान, न्यायपालिका की मदद से अनुच्छेद 370 खत्म करा सकती है भाजपा

नई दिल्ली ( 28 जनवरी ): नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली जम्मू-कश्मीर सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि बीजेपी न्यायपालिका के जरिए 370 रद्द करा सकती है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी अनुच्छेद 370 रद्द करने के लिए न्यायपालिका का इस्तेमाल कर सकती है, क्योंकि 'वह समझ चुकी है कि आर्टिकल 370 रद्द करने के लिए विधायिका का रास्ता नहीं अपना सकती।'

उमर ने यहां राज्य विधानसभा में कहा, 'बीजेपी ने शायद अपनी ओर से यह मान लिया है कि वह अनुच्छेद 370 समाप्त करने के लिए विधायिका का इस्तेमाल नहीं कर सकती, जो राज्य को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। जब बीजेपी के लोग (अनुच्छेद 370 रद्द करने के लिए) विधायिका के रास्ते ऐसा नहीं कर सकते, तो न्यायपालिका का इस्तेमाल कर सकते हैं।'

उन्होंने कहा, 'जो यह मानते हैं कि बीजेपी ने अनुच्छेद 370 पर अच्छा काम किया है और यह कि पार्टी ने मान लिया है कि अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती, वे गलत हैं।' विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी थीं, जिन्होंने अपने मंत्रालयों गृह, योजना, पर्यटन आदि के लिए अनुदान पेश किए। उमर अब्दुल्ला ने सूबे की पीडीपी-बीजेपी सरकार को चेतावनी दी कि यदि इससे किसी तरह की छेड़छाड़ का प्रयास किया गया तो बड़ा विवाद हो सकता है।

अब्दुल्ला ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 'आप हमेशा हम पर आरोप लगाते हैं कि हमारी ओर से गैर-मुद्दों को ही मुद्दा बनाया जाता है और विवाद भड़काने की कोशिश की जाती है। लेकिन, मैं आप लोगों को बता देना चाहता हूं कि हम मुद्दे तैयार नहीं करते। इन्हें सरकार की ओर से पेश किया जाता है। हम आपको भविष्य में सामने आने वाले बड़े विवाद के बारे में आगाह करना चाहते हैं।' यही नहीं उमर अबुदुल्ला ने कोर्ट में सिक्यॉरिटाइजेशन ऐंड रीकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशल असेट्स ऐंड इन्फोर्समेंट ऑफ सिक्यॉरिटी इंटरेस्ट (सरफेसाई) ऐक्ट को लेकर कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कमजोर पक्ष रखे जाने की भी निंदा की।

यह ऐक्ट बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को लोन की रिकवरी के लिए आवासीय और वित्तीय संपत्तियों की नीलामी की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, 'हमें सरफेसाई ऐक्ट को लेकर चिंता थी क्योंकि हम सोचते हैं कि वह (बीजेपी) 35ए को लेकर भी अदालत का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करना है। जहां आप एक तरफ करोड़ों रुपये घरों के पुनर्निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं आपको कुछ लाख रुपये खर्च कर केस लड़ने के लिए काबिल वकील भी खड़े करने चाहिए।'

SC ने कहा था, संविधान से परे J&K की संप्रभुता नहीं

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि भारत और उसके संविधान के दायरे से बाहर जम्मू-कश्मीर के पास कोई संप्रभुता और विशेषाधिकार नहीं नहीं हैं। यही नहीं शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि सूबे के नागरिक सर्वप्रथम भारत के सिटिजन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरफेसाई ऐक्ट भारत की संसद से पारित हुआ ऐक्ट है और इसे स्टेट में भी लागू किया जा सकता है।