मास्को - 1980: भारत ने ओलंपिक हॉकी का आखिरी स्वर्ण जीता

नई दिल्ली(26 जुलाई): 1980 में पहली और आखिरी बार ओलंपिक खेलों का आयोजन पूर्वी यूरोप में किया गया। ओलंपिक खेलों में यह पहला मौका था जब किसी साम्यवादी देश में इसका आयोजन किया गया। इसके बाद सिर्फ 2008 का बीजिंग (चीन) ओलंपिक ही साम्यवादी देश में आयोजित हुआ। उल्लेखनीय है कि इसी ओलंपिक में भारत ने आखिरी हॉकी स्वर्ण जीता था।

सोवियत संघ को मिली मेजबानी: इस ओलंपिक के लिए अमेरिका के लॉस एंजिलिस और उसके धुर विरोधी सोवियत संघ के मास्को शहर ने मेजबानी का दावा ठोका था। मास्को ने 20 के मुकाबले 39 वोट लेकर इन खेलों की मेजबानी का अधिकार हासिल किया।

अमेरिका ने नहीं लिया हिस्सा: अफगानिस्तान में सोवियत युद्ध के कारण अमेरिका की अगुआई में 65 देशों ने इस ओलंपिक का बाहिष्कार किया। हालांकि बहिष्कार करने वाले कई देशों के एथलीटों ने अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के झंडे तले हिस्सा लिया। सोवियत संघ ने भी उसके बाद 1984 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में हिस्सा लेने से इनकार करके दिया।

हॉकी में भारत की वापसी: मोन्ट्रियल में पदक गंवाने वाली भारतीय हॉकी टीम ने फिर वापसी करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसमें छह देशों ने हिस्सा लिया था। महिला हॉकी की शुरुआत: महिलाओं की हॉकी स्पर्धा इसी ओलंपिक से शुरू हुई। इसमें भारत को चौथा स्थान हासिल हुआ।

मेजबान टॉप पर: अमेरिका की अनुपस्थिति में मेजबान सोवियत संघ 195 पदक जीतकर मेडल टैली में पहले स्थान पर रहा। पूर्वी जर्मनी दूसरे और बुल्गारिया तीसरे स्थान पर रहा। सालों बाद ब्रिटिश ने जीता पदक: 1924 के बाद पहली बार किसी ब्रिटिश युवक एलेन वेल्स ने 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण जीता।