नोटबंदीः नेपाल-भूटान से भी वापस आ रहे हैं 1000-500 के पुराने नोट

नई दिल्ली (9 फरवरी): नोटबंदी के बाद हालात सामान्य बनाए जाने के लिए निर्धारित 50 दिन की अवधि समाप्त होने के एक महीने बाद आरबीआई ने कहा है कि वह जमा किए गए पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों के बारे में आंकड़ा पेश करने की योजना पर काम कर रहा है और इस बारे में निर्णायक आंकड़ा 30 जून के बाद घोषित कर दिया जाएगा। 30 जून को पुराने नोट स्वीकार करने की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी।

 

8 नवंबर को सरकार द्वारा अचानक नोटबंदी का ऐलान किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने लोगों से पुराने नोट 30 दिसंबर तक जमा करने का समय दिया था। हालांकि 9 नवंबर से 30 दिसंबर तक देश से बाहर गए भारतीयों को 30 दिसंबर के बाद भी 31 मार्च तक पुराने नोट जमा करने का मौका दिया गया है, जबकि एनआरआई के लिए 30 जून तक का समय नोट जमा करने के लिए दिया गया है।

 

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा ने कहा कि निर्णायक आंकड़े तभी घोषित किए जा सकते हैं जब सहकारी बैंकों में जमा नोटों की गिनती पूरी हो जाए, नेपाल और भूटान से इस बारे में जानकारी हासिल हो जाए और एनआरआई द्वारा पुराने नोटों की जमा के लिए अंतिम समय-सीमा पूरी हो जाए। मूंदड़ा ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'ये सभी जानकारियां हासिल होने के बाद हम जमा हुए पुराने नोटों का आंकड़ा जारी कर देंगे। लेकिन निर्णायक आंकड़े और नोटों की भारी मात्रा में जमा की जांच में समय लगेगा।'

 

उन्होंने कहा, 'प्रवासी भारतीयों के लिए पुराने नोट जमा करने की समय-सीमा 30 जून तक है जिसके दौरान वे रकम जमा करा सकते हैं। इन सभी जमाओं के पूरा होने के बाद हम आंकड़ा जारी कर देंगे।' भारतीय मुद्रा नेपाल और भूटान में लेनदेन के लिए स्वीकार्य है। नोटबंदी के बाद, नेपाल राष्ट्र बैंक और भूटान के रॉयल मोनेटरी अथॉरिटी, दोनों ही पुराने नोटों को जमा की सुविधा को आसान बनाने के लिए आरबीआई के संपर्क में रहे हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आर गांधी ने नोटबंदी के बाद कहा था कि केंद्रीय बैंक ने 9.92 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकिंग व्यवस्था में डाले हैं।