कविता कृष्णन की पोस्ट के बाद FB पर छिड़ी 'फ्री सेक्स' पर बहस

नई दिल्ली (17 मई) :  महिला अधिकार, सहमति से सेक्स या फ्री सेक्स...इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर गरमा-गरम बहस छिड़ी है। बहस छेड़ी है ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमन एसोसिएशन की सेक्रेटरी और सीपीएम ( एमएल) पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन और उनकी मां लक्ष्मी कृष्णन ने।

'नारीवादी इस पहल का मकसद लिंग आधारित छवि को तोड़ना है।' कविता कृष्णन ने अपने फेसबुक पेज पर यह कोट किया और इसके साथ ही 'फ्री सेक्स' को लेकर बहस शुरू की है। इस पोस्ट में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के शिक्षकों को भी निशाने पर लिया है।

JNU के शिक्षकों ने कथित रूप से 2015 में एक दस्‍तावेज तैयार किया था, जिसमें यूनिवर्सिटी के छात्रों को सेक्‍स और शराब से भरे जीवन के बारे में बताया गया था। पोस्‍ट में दावा किया गया है कि कविता ने एक टीवी चैनल की डिबेट में कहा कि यह अफसोस की बात है कि कुछ लोग 'फ्री सेक्‍स' (अपनी मर्जी से किसी भी व्‍यक्ति से शारीरिक संबंध बनाना) से डरते हैं।

कविता के फेसबुक पेज पर फ्री सेक्स के समर्थन में एक पोस्ट की थी। इसमें उन्‍होंने लिखा, ‘यह अफसोस की बात है कि कुछ लोग ‘फ्री सेक्स’ (अपनी मर्जी से किसी भी व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाना) से डरते हैं। उन्होंने लिखा कि ‘अनफ्री सेक्स’ कुछ और नहीं बल्कि रेप है।’ इस पर एक यूजर जीएम दास ने कमेंट किया, ‘अपनी मां/बेटी से पूछो कि क्या उन्होंने फ्री सेक्स किया है।’ इस पर कविता ने कहा, ‘हां मेरी मां ने ऐसा किया है। उम्मीद है कि आपकी मां ने भी ऐसा किया होगा क्योंकि यदि कोई महिला आजाद नहीं है, तो यह सेक्स नहीं रेप है, समझे।’

इसके बाद इस बहस में कविता की मां लक्ष्मी कृष्णन भी कूद गईं। उन्होंने लिखा, ‘हाय जीएम दास! मैं कविता की मां हूं। बिलकुल मैंने फ्री सेक्स किया है। जब और जैसे मैं चाहती थी, जिस आदमी के साथ चाहती थी, फ्री सेक्स किया। सहमति से सेक्स चाहने वाले हर महिला और पुरुष के साथ मैं लड़ी। अनफ्री और असहमति से किए गए सेक्स के खिलाफ हमेशा रही।’

फेसबुक पर कई लोगों ने कविता और उनकी मां का समर्थन किया है। कविता की पोस्ट को 600 लाइक्स और 30 शेयर मिले हैं।