आपको भी रूला देगा हिंदुस्तान का यह शर्मनाक सच...

नई दिल्ली (25 अगस्त): 21वीं सदी के हिंदुस्तान के एक बेहद कड़वे और शर्मनाक सच दिखाती खबर सामने आई है। जहां एक गरीब शख्स को अपनी पत्नी का शव कंधे पर लेकर दस किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है। हम विकास के तमाम दावे करने वाली सरकारों को ये हकीकत दिखा रहे हैं, जहां एक गरीब को उसकी पत्नी की मौत के बाद शव को अस्पताल से घर ले जाने के लिए कोई सुविधा तक नहीं मिली।

पूरी खबर ये है कि ओडिशा के कालाहांडी में दाना मांझी नाम के इस शख्स की 42 साल की पत्नी की टीबी की वजह से मौत हो गई थी। जिस भवानीपटना के अस्पताल में महिला की मौत हुई, उस अस्पताल ने शव ले जाने के लिए गरीब दाना मांझी को एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई।

दाना मांझी ने की विनती, पर नहीं मिली एंबुलेंस... - दाना मांझी ने कहा है कि मैंने अस्पताल प्रशासन से कहा था कि मैं गरीब आदमी हूं और गाड़ी का किराया नहीं दे सकता। - बार-बार विनती करने के बाद भी उन लोगों ने कहा कि वे कोई मदद नहीं कर सकते। - थक हारकर उसने कपड़े में अपनी पत्नी का शव लपेटा और उसे कंधे पर लेकर साठ किलोमीटर अपने गांव मेलघारा की ओर चल पड़ा। - दस किलोमीटर तक दाना मांझी अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर चलता रहा। - उसके साथ 12 साल की उसकी नाबालिग बेटी भी थी जो एक झोले में अपना सामान लिये उसके साथ चली जा रही थी। - रास्ते में उसे कई लोगों ने देखा, कई गाड़ियां भी गुजरीं, लेकिन न तो किसी ने उससे ऐसे शव लेकर जाने की वजह पूछी न ही किसी ने मदद की कोशिश की।

पत्रकारों ने की मदद... - जब स्थानीय पत्रकारों की नजर इस शख्स पर पड़ी तो उन लोगों ने दाना मांझी से पूछताछ की। - पत्रकारों ने फिर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को फोन किया और दाना मांझी के लिए एक एंबुलेंस का इंतजाम कराया।

-इसके बाद दाना मांझी बाकी के पचास किलोमीटर का सफर कंधे पर पत्नी का शव लेकर पूरा करने की त्रासदी से बच पाया।

राज्य में सरकार चलाती है महाप्रयाण योजना... - ये हालत तब है जबकि ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने गरीबों के शव को घर तक पहुंचाने के लिए महाप्रयाण योजना भी चलाती है। - इसमें राज्य के सरकारी अस्पतालों से गरीबों के शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस की सहायता दी जाती है।

- राज्य के 37 अस्पतालों में ये सुविधा चालू भी है।

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