एनएसजी में भारत को शामिल कराना अमेरिका की प्रतिष्ठा का सवाल बना

नई दिल्ली (22जून): भारत को एनएसजी में शामिल में किये जाने को लेकर दि में दो-दो बार बदल रहे चीन के रुख से अमेरिका की पेशानी पर बल पड़ रहे हैं। भारत को मेंबर बनाना अब अमेरिका की प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बन गया है।अगर भारत इस दौड़ में पिछड़ जाता है तो ग्लोबल पॉलिटिक्स में भारत से ज्यादा अमेरिका की छवि पर प्रतिकूल असर होगा, और चीन का दबदबा दुनिया में बढ़ जायेगा।

इसलिए अमेरिका ने दुनिया भर में अपने मिशनों को सक्रिय कर दिया है ताकि चीन पर चारों ओर से कूटनीतिक दबाव बढे और जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ताशकंद में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हो तो मोदी के सामने वो किसी खास शर्त या समझौते को सामने न रख पायें। भारत के लिए भी ताशकंद की मीटिंग और सियोल में चल रही एनएसजी की मीटिंग के नतीजे काफी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मोर्चों पर गहरा असर डालने वाले होंगे।

खास तौर पर पाकिस्तान और नेपाल के साथ भारत संबंधों पर असर पड़ेगा। अगर भारत को एनएसजी में मेंबरशिप मिल जाती है तो पाकिस्तान के बड़वोलेपन पर लगाम लगेगी और नेपाल की सरकार को समझ आयेगा कि भरत के मुकाबले चीन की तरफ उसके झुकाव का नतीजा सकारात्मक नहीं रहेगा।