सरकारी बैंकों का जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में करीब 50,000 करोड़ डूबने का अनुमान

नई दिल्ली ( 24 मई ): सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का घाटा (पीएसबी) जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में 50,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू सकता है। यह एक रिकॉर्ड और जनवरी-मार्च 2017 में हुए 19,000 करोड़ रुपये के घाटे के दोगुने से भी ज्यादा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की सख्ती की वजह से बैंकों को यह भारी-भरकम घाटा हुआ है। दरअसल, आरबीआई ने सभी लोन-रीस्ट्रीक्चरिंग स्कीम को खत्म कर दिया। इस वजह से सरकार पर पूर्वनिर्धारित रकम से ज्यादा पैसे बैंकों में डालने का दबाव बढ़ गया है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 सरकारी बैंकों ने पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के परिणाम घोषित कर दिए हैं, इनमें इंडियन बैंक एवं विजया बैंक को छोड़कर सभी 13 नुकसान में रहे हैं। इन सभी 15 बैंकों की कंसॉलिडेटिड अर्निंग्स (समेकित आमदनी) में 44,241 करोड़ रुपये का घाटा सामने आया है।बाकी 6 बैंकों के रिजल्ट आने पर घाटे का यह आंकड़ा बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये से पार करने की आशंका है। अभी आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनाइटेड बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक आदि के रिजल्ट आने बाकी हैं। इनमें सिर्फ बैंक ऑफ बड़ौदा ने अक्टूबर-दिसंबर 2017 तिमाही में मुनाफा कमाया था।