नियमों में बदलाव, पैकेज्ड फ्रूड प्रोसेस्ड नहीं होंगे, तभी कंपनियां लिख सकेंगी नेचुरल या प्योर

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 14 नवंबर ): बाजार में पैकेज्ड फूड की मांग काफी बढ़ गई और ज्यादा सामान पैकेट में मिल रहे हैं। कर्इ कंपनियां अपने आइटम को बेचने और ब्रांडिंग करने के लिए पैकेज्ड फूड के पैकेट पर नेचुरल, फ्रेश, ओरिजिनल, ट्रेडिशनल, प्योर, ऑथेंटिक, जेनुइन और रियल भी लिखती है। लेकिन ऐसी कंपनियों को फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआर्इ) ने बड़ा झटका दे दिया है।

एफएसएसआर्इ ने अपने नियमों में बदलाव किया है। जल्द ही इसका इसका नोटिफिकेशन भी हो सकता है। जिसमें कहा गया है कि कंपनियां ऐसे शब्दों का इस्तेमाल तभी कर पाएंगी जब सामान को धोने, छीलने, ठंडा करने और छंटाई करने के अलावा किसी और तरीके से प्रोसेस ना किया गया हो। साथ ही उनकी ऐसी प्रोसेसिंग न हुर्इ हो, जिनसे उनकी मूल तत्व बदल जाएं।

मीडिया रिपोर्ट में रेग्युलेशन के मुताबिक कहा गया है कि जो कंपनियां ब्रैंड नेम या ट्रेडमार्क के तौर पर ऐसे टर्म्स यूज करेंगी, जिसका मतलब नैचरल, फ्रेश, ओरिजिनल, ट्रेडिशनल, प्योर, ऑथेंटिक, जेनुइन और रियल निकलता होगा, उन्हें यह बात साफ तौर पर लिखनी होगी कि यह सिर्फ उनका ब्रैंड नेम या ट्रेडमार्क का हिस्सा है और ऐसा उत्पाद के बारे में नहीं कहा जा रहा। दे

फूड कंपनियां ऐड और प्रमोशंस में न्यूट्रिशन क्लेम, नॉन एडिशन क्लेम (चीनी या नमक नहीं डाले जाने सहित), हेल्थ क्लेम, डाइट गाइडलाइंस या हेल्दी डाइट संबंधी क्लेम और कंडिशनल क्लेम सहित किस तरह के दावे कर सकती हैं, रेग्युलेशन में उसका क्राइटेरिया भी दिया गया है। पैकेज्ड फूड कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स का प्रचार कंप्लीट मील रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं कर सकतीं। वे हेल्दी लाइफस्टाइल की अहमियत को कम दिखा नहीं सकतीं। अगर कंपनी ऐसे क्लेम करना चाहती है, जिसके बारे में रेग्युलेशन में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है तो उसे पहले अथॉरिटी की इजाजत लेनी होगी।

नए रेग्युलेशन में फूड कंपनियों को अपने प्रॉडक्ट्स को बढ़ावा देने या उपभोक्ता की खरीदारी के तौर तरीकों को प्रभावित करने के लिए दूसरे मैन्युफैक्चर के प्रॉडक्ट्स के दावे को कमतर बताने वाला ऐड या दावा करने की इजाजत नहीं होगी। जो कंपनियां भ्रामक दावों या विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को बरगलाएंगी, उनके खिलाफ सख्त सजा के प्रावधान हैं।